21 अक्टूबर 1943 का दिन भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। इसी दिन नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में ‘आज़ाद हिंद सरकार’ की स्थापना की थी। इस सरकार को जापान, जर्मनी, इटली और अन्य कई देशों का समर्थन प्राप्त था। इसका उद्देश्य था — ब्रिटिश हुकूमत को उखाड़ फेंकना और भारत को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित करना।
नेताजी द्वारा गठित यह सरकार सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं थी, बल्कि इसके पास अपनी प्रशासनिक व्यवस्था, सेना (आज़ाद हिंद फौज), और झंडा था। नेताजी खुद इस सरकार के प्रधानमंत्री, युद्ध मंत्री और विदेश मंत्री बने थे। उन्होंने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह को भी “शहीद” और “स्वराज द्वीप” के रूप में नामित कर दिया था।
आजाद हिंद सरकार का गठन भारतीयों में आत्मविश्वास जगाने वाला कदम था। इसने यह सिद्ध किया कि भारतवासी खुद अपना शासन चला सकते हैं। नेताजी का नारा — “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा” — आज भी हर देशभक्त के हृदय में जोश भर देता है।
21 अक्टूबर को हम न केवल एक सरकार की स्थापना को याद करते हैं, बल्कि उस अदम्य साहस और बलिदान को भी नमन करते हैं जिसने आज़ादी की राह को तेज किया। नेताजी और आज़ाद हिंद सरकार, भारतीय इतिहास का वो अध्याय हैं जो हमें हमेशा प्रेरित करते रहेंगे।









