बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा
ज्ञान का मंदिर भी आलोकित उठा दीयों की रौशनी से
जगदलपुर। संस्कृत में एक श्लोक है – ‘विद्या ददाति विनयं, विनयाद याति पात्रताम, पात्रा त्वात धनमा न्पोती, धनात, धरमः ततः सुखम।’ इसका अर्थ है विद्या से हमें विनयशीलता प्राप्त होती है और विनम्र व्यक्ति ही योग्यता हासिल करता है। योग्यता और पात्रता के आधार पर ही हम धन प्राप्त कर सकते हैं। धन से हर तरह के सुख की प्राप्ति होती है। सार यही कि विद्या और ज्ञान से ही व्यक्ति सफल, सुखी एवं समृद्ध बन पाता है। दीपावली पर हम सभी अपने घरों पर तो दीये जलाते हैं और माता लक्ष्मी से सुख समृद्धि और ऐश्वर्य की कामना करते हैं, मगर उस मंदिर को भूल जाते हैं, जो हमें हर तरह से काबिल बनाता है। इस वर्ष की दिवाली से प्रदेश के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने ज्ञान के मंदिर स्कूलों में भी दीये जलाने की अपील की है। इस अपील पर अमल करते हुए बस्तर संभाग में पहली बार बस्तर के जिला शिक्षा अधिकारी बीआर बघेल ने स्कूलों में दीये जलाकर ज्ञान की देवी सरस्वती के दरबार को रौशन करने की परंपरा शुरू की है। शिक्षा के प्रचार प्रसार के लिए शिक्षा मंत्री के आह्वान पर जिला शिक्षा अधिकारी श्री बघेल द्वारा शुरू की गई यह पहल सराहनीय है।

बस्तर जिले में लक्ष्मी पूजा के दिन शिक्षा मंत्री की अपील पर दीपोत्सव कार्यक्रम की सभी ने सराहना की। विशेषकर बच्चे काफी उत्साहित नजर आए। जिला शिक्षा अधिकारी बीआर बघेल के साथ स्कूल में दीये जलाकर बच्चे बेहद खुश थे। शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने स्कूल को देवालय बताते हुए अपील की थी कि इस दीपावली में स्कूल के नाम एक दीया जलाएं। बस्तर के जिला शिक्षा अधिकारी बीआर बघेल ने भी शिक्षा मंत्री श्री यादव के आह्वान पर अमल करते हुए संकुल केंद्र गढ़िया के प्राथमिक विद्यालय नेगीरास में एक दिया स्कूल के नाम अर्पित किया। डीईओ श्री बघेल के साथ ब्लॉक समन्वयक पीआर सिन्हा, करकपाल के स्कूल समन्वयक और गढ़िया सीएसी और बच्चों के साथ इस देवालय में लक्ष्मी पूजा के दिन रात्रि प्रहर दीपोत्सव मनाया गया। डीईओ श्री बघेल ने बताया- मैने 1977 से पांचवीं बोर्ड की परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की थी। इसी स्कूल में मिले ज्ञान के दम पर आज मैं इस मुकाम तक पहुंच पाया हूं। जिला शिक्षा अधिकारी बीआर बघेल ने सभी शिक्षकों एवं ग्रामीणों से हर वर्ष दीपावली पर स्कूलों में भी दीये जलाने की अपील की।









