दिवाली के अगले दिन मनाई जाने वाली गोवर्धन पूजा हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो भगवान श्रीकृष्ण की प्रकृति संरक्षण और मानव सेवा की शिक्षा को स्मरण कराता है। यह पर्व विशेष रूप से ब्रज, मथुरा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश में धूमधाम से मनाया जाता है।
पौराणिक कथा के अनुसार, जब इंद्रदेव के क्रोध से मथुरा में मूसलधार बारिश होने लगी, तब भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगुली पर उठाकर लोगों और पशुओं को आश्रय दिया। इसी चमत्कार की स्मृति में गोवर्धन पूजा की जाती है।
इस दिन गाय, बैल, और अन्य पशुओं की विशेष पूजा होती है। गांवों में लोग गोबर से गोवर्धन पर्वत का स्वरूप बनाते हैं और उसके चारों ओर दीप जलाकर परिक्रमा करते हैं। अन्नकूट का आयोजन होता है जिसमें अनेकों प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं और भगवान को अर्पित किए जाते हैं।
गोवर्धन पूजा हमें प्रकृति, पशुधन और कृषि के महत्व को समझने की प्रेरणा देती है। यह पर्व सामूहिकता, सेवा और सम्मान की भावना को बढ़ावा देता है। वास्तव में, गोवर्धन पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि संवेदनशील समाज और पर्यावरण संतुलन की ओर एक कदम है।









