-यह सांगठनिक एकता की बड़ी जीत: दुर्योधन यादव
-दृढ़ता के साथ जारी रहेगा संघर्ष: हिमांगिनी पांडे
अर्जुन झा/जगदलपुर। छत्तीसगढ़ स्वामी आत्मानंद संविदा शिक्षक एवं कर्मचारी संघ के निरंतर प्रयासों के परिणाम स्वरूप राज्य शासन ने स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालयों में संविदा भर्ती हेतु मानक विज्ञापन प्रारूप जारी करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय को संघ द्वारा शासन के समक्ष प्रस्तुत 9 सूत्रीय मांगों में से एक प्रमुख मांग की दिशा में उठाया गया सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

प्रदेश के विभिन्न जिलों में संघ के पदाधिकारियों एवं सदस्यों द्वारा लगातार दिए जा रहे ज्ञापनों और रचनात्मक संवाद के कारण शासन ने संविदा भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और एकरूप बनाने की पहल की है। संघ ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा है कि यह उनके संघर्ष की शुरुआती सफलता है, जबकि शेष आठ मांगों की पूर्ति के लिए संघर्ष और संवाद दोनों मार्गों पर प्रयास जारी रहेंगे। संघ के प्रदेश अध्यक्ष दुर्योधन यादव ने कहा कि संघ का यह संघर्ष शिक्षकों और कर्मचारियों के सम्मान एवं अधिकारों के लिए है। शासन द्वारा हमारी एक मांग को स्वीकार किया जाना सकारात्मक संकेत है, परंतु हमारा उद्देश्य तभी पूरा होगा जब सभी नौ मांगें स्वीकार होंगी। हम शासन के इस निर्णय का स्वागत करते हैं, और आशा करते हैं कि शेष मांगों पर भी जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा। प्रदेश उपाध्यक्ष हिमांगिनी पांडे का कहती हैं कि यह निर्णय सभी संविदा शिक्षकों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। हमारी आवाज शासन तक पहुंची, यह हमारे संगठन की मजबूती का प्रमाण है। परंतु अभी बहुत रास्ता बाकी है, शेष आठ मांगों को लेकर संघ का संघर्ष पूरी दृढ़ता और संयम के साथ जारी रहेगा।
संघ की आगामी रणनीति
संघ की ओर से स्पष्ट किया गया है कि अब ध्यान सेवा स्थायित्व, वेतन समानता, कार्यस्थल सुरक्षा, वार्षिक वेतनवृद्धि, स्थानांतरण नीति, सेवा अवधि की गणना, प्रोत्साहन योजना और सेवा नियमितीकरण जैसी शेष आठ मांगों पर केंद्रित किया जाएगा। संघ ने कहा कि उसका उद्देश्य केवल मांगों की पूर्ति नहीं, बल्कि संविदा शिक्षकों और कर्मचारियों को समान अवसर, सम्मान और स्थायित्व दिलाना है। संघ ने सभी संविदा शिक्षकों और कर्मचारियों से अपील की है कि वे एकता बनाए रखें और संगठन के साथ जुड़े रहें ताकि आगे की सभी मांगों को भी शासन के समक्ष मजबूती से रखा जा सके।
संघ का कहना है कि यह शुरुआत है, अंत नहीं। जब संविदा शिक्षक और कर्मचारी संगठित होकर एक आवाज में बोलते हैं, तो परिवर्तन अवश्य संभव होता है। हमारी एकजुटता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।









