बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा
क्या गोली की बोली ही समझते रहेंगे नक्सली?
जगदलपुर। लगता है नक्सलियों को सरकार की रेड कार्पेट और स्वागत के लिए लालायित बाहें पसंद नहीं हैं, उन्हें सिर्फ गोली की ही बोली पसंद आती है, या फिर हो सकता है यह उनकी खिसियाहट व झुंझलाहट हो कि वे निरीह ग्रामीणों को मौत के घाट उतारते चले जा रहे हैं। बस्तर संभाग में नक्सलियों ने फिर दो बेकसूर ग्रामीण युवकों की निर्मम हत्या कर दी है।

युवकों की हत्या का मामला बस्तर के बीजापुर जिले से सामने आया है। बीजापुर जिले के उसूर थाना क्षेत्रान्तर्गत ग्राम नेला कांकेर निवासी 25 वर्षीय रवि कट्टम पिता कन्ना उम्र एवं 38 वर्षीय तिरूपति सोढ़ी पिता नरसा की नक्सलियों द्वारा 24 अक्टूबर को धारदार हथियार से मारकर हत्या कर दी गई। सूचना पर थाना उसूर द्वारा घटना की तस्दीकी की जा रही है। उल्लेखनीय है कि बस्तर संभाग में नक्सली लगातार निर्दोष ग्रामीणों की हत्याएं करते जा रहे हैं। सुरक्षा बलों के हाथों लगातार मात खा रहे नक्सली अब ग्रामीणों को निशाना बना रहे हैं। यह उनकी भड़ास का नतीजा है जिसे कि वे अब निरीह ग्रामीणों की हत्याओं पर उतार आए हैं। हताशा और निराशा के दौर से गुजर रहे नक्सली इस कदर कमजोर हो चले हैं कि वे अपना वजूद दिखाने के लिए आम ग्रामीणों पर जुल्मो सितम ढाने लगे हैं। आर्थिक, हथियारों और संख्या बल के मामले में नक्सलियों की कमर पूरी तरह टूट चुकी है। उनके साथी लगातार पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करते जा रहे हैं। वहीं ग्रामीण भी निरंतर उनसे दूर होते जा रहे हैं। ऐसे में नक्सलियों का तिलमिलाना गैरवाजिब नहीं है। उधर सरकार कहती आ रही है कि नक्सली नेता शांति वार्ता के लिए सामने आते हैं, तो उनका स्वागत है, हम उनके लिए रेड कार्पेट बिछाए बैठे हैं और बाहें फैलाए खड़े हैं। इस तरह का ऐलान छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने जगदलपुर की धरती से किया था, मगर लगता है कि नक्सलियों को रेड कार्पेटनहीं रेड ब्लड ज्यादा पसंद है, बातचीत नहीं, गोली की ही बोली पसंद है। अगर नक्सली ऐसा ही खूनी खेल खेलते रहे तो हो सकता है सरकार और भी आक्रामक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी।









