Home मुख्य ख़बरें आस्था का महापर्व: सूर्य उपासना और पारिवारिक समर्पण का प्रतीक छठ पूजा

आस्था का महापर्व: सूर्य उपासना और पारिवारिक समर्पण का प्रतीक छठ पूजा

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छठ पूजा भारतीय संस्कृति का एक ऐसा पर्व है जो श्रद्धा, संयम और स्वच्छता का अद्भुत संगम है। यह पर्व मुख्यतः बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और नेपाल के कुछ हिस्सों में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन आज इसकी गूंज देशभर के साथ-साथ विदेशों में भी सुनाई देती है। छठ पूजा सूर्य देवता और छठी मइया को समर्पित होती है, जिनसे आरोग्य, समृद्धि और संतान सुख की कामना की जाती है।

यह पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है और कुल चार दिनों तक चलता है। इसकी शुरुआत नहाय खाय से होती है, फिर खरना, सांध्य अर्घ्य और अंत में उषा अर्घ्य देकर पूजा संपन्न होती है। व्रती 36 घंटे का निर्जल उपवास रखते हैं और गंगा, तालाब या किसी साफ जलाशय में खड़े होकर अर्घ्य देते हैं।

छठ पूजा न केवल आध्यात्मिक आस्था का पर्व है, बल्कि यह पर्यावरण और शुद्धता का भी संदेश देता है। इस पर्व में बांस की टोकरी, मिट्टी के दीए, केले का पेड़, ठेकुआ जैसे पारंपरिक पकवानों का उपयोग किया जाता है जो हमारी परंपराओं से जुड़ाव को दर्शाता है।

छठ पूजा हमें नारी शक्ति, आत्मसंयम और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का भाव सिखाती है। यह पर्व सच्चे मन और साफ नीयत से किया जाए तो हर मुराद पूरी होती है — ऐसी मान्यता है।

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