AI को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर डीपफेक वाले एआई वीडियो और कंटेंट पर लगाम लगाने की तैयारी हो रही है। हाल ही में सरकार ने डीपफेक वाले कॉन्टेंट को रेगुलेट करने का प्लान बनाया है। वहीं, पड़ोसी देश चीन ने सोशल मीडिया इंफ्लुएंशर्स पर नकेल कस दिया है। चीन ने सोशल मीडिया पर डीपफेक वीडियो या कंटेंट शेयर करने के लिए लेबल करने का कानून बना दिया है। ऐसा न करने पर बड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
सरकार का कहना है कि अगर कोई भी एआई लेबल हटाता है या फिर उसमें छेड़छाड़ करता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। CAC ने इसे 2025 के Qinglang यानी साफ और उज्जवल नाम के अभियान का हिस्सा बताया है। इस अभियान का मकसद इंटरनेट पर अफवाहों को रोकना है। चीन और भारत ही नहीं दुनियाभर में एआई को लेकर कड़े नियम बनाने की मांग उठ रही है।
एआई कंटेंट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ये देखने में इतने रियल लगते हैं कि आम यूजर इनमें अंतर का पता नहीं लगा पाते हैं। यूरोपीय यूनियन ने भी एआई एक्ट बनाया है, जिसमें एआई कंटेंट की लेबलिंग अनिवार्य कर दिया है। भारत में एआई को लेकर जरूरी फ्रेमवर्क लॉन्च किए गए हैं, जिनमें नेशनल स्ट्रेटेजी फॉर एआई (2018), प्रिंसिपल फॉर रिस्पॉन्सेबल एआई (2021) और ऑपरेशनलाइजिंग प्रिंसिपल फॉर रिस्पॉन्सिल एआई शामिल हैं। हालांकि, ये कानून सख्त नहीं हैं लेकिन ये फ्रेमवर्क एआई के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए जरूरी कदम हैं।









