= महिला एवं बाल विकास विभाग की सुपरवाइजर ने झाड़ा गजब रुतबा =
= बारदा के आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों की सेहत और जान से खिलवाड़ =
-अर्जुन झा-
-बकावंड। विकासखंड बकावंड में महिला एवं बाल विकास विभाग के कर्मचारियों की नजरों में कलेक्टर की शायद कोई औकात नहीं है, तभी तो खुलेआम रुतबा झाड़ते हैं कि जहां शिकायत करनी हो, कर लो, कलेक्टर भी हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। एक साधारण कर्मचारी द्वारा कलेक्टर और मीडिया के प्रति अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करना जहिर करता है कि इस विभाग में लापरवाही और मनमानी चरम पर है। कर्मचारी आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों की सेहत और जान से खुलकर खिलवाड़ कर रहे हैं। इसके खिलाफ आवाज उठाने पर मीडिया ही नहीं, बल्कि आईएएस ऑफिसर कलेक्टर तक की गरिमा को ठेस पहुंचाई जाती है।
कलेक्टर और मीडिया के अपमान तथा आंगनबाड़ी केंद्र के मासूम बच्चों की सेहत एवं जान से खिलवाड़ का मामला बकावंड ब्लॉक की ग्राम पंचायत बारदा से सामने आया है। बारदा के आंगनबाड़ी केंद्र में अव्यवस्था और लापरवाही का माहौल साफ देखने को मिला। ग्राउंड जीरो पर की गई कवरेज के दौरान कई गंभीर खामियां उजागर हुईं।केंद्र में दर्ज 15 बच्चों में से केवल 8 बच्चे ही उपस्थित पाए गए। रसोईया ने बताया कि बच्चों को प्रतिदिन केवल बड़ी-आलू की सब्जी खिलाई जाती है, जबकि नियमों के अनुसार बच्चों को विविध सब्जियां, दाल और पौष्टिक आहार मिलना चाहिए।आंगनबाड़ी केंद्र संचालन का उद्देश्य ही बच्चों और गर्भवती एवं शिशुवती माताओं की सेहत में सुधार लाना तथा उन्हें पौष्टिक खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना है। बारदा के आंगनबाड़ी केंद्र में उद्देश्य के विपरीत काम चल रहा है।आंगनबाड़ी केंद्र के सामने भारी गंदगी और घास-फूस का अंबार लगा हुआ था। जिससे बच्चों में बीमारियों जहरीले जीव जंतुओं का खतरा मंडरा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र की लिपाई-पोताई के लिए बजट जारी होने के बावजूद सफाई का काम नहीं हुआ है। जब इस विषय में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और वरिष्ठ सुपरवाइजर से सवाल किया गया, तो उच्च स्तर की एक अधिकारी सुपरवाइजर ने पत्रकारों से खुलेआम कहा- हम बच्चों को जो चाहे वही खिलाएंगे, जाकर कलेक्टर से शिकायत कर दो, कलेक्टर भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता। इस तरह का गैर-जिम्मेदाराना बयान स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। स्थिति यह रही कि सवाल-जवाब बढ़ते देख संबंधित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता वहां से चली गईं।ग्रामीणों ने मांग की है कि जिला प्रशासन तत्काल जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करे, ताकि बच्चों के भविष्य और स्वास्थ्य से खिलवाड़ न हो।









