भीषण चक्रवाती तूफान ‘मोंथा’ के आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की प्रक्रिया मंगलवार शाम शुरू हो गई है और यह अगले तीन से चार घंटों तक जारी रहेगी। थाई भाषा में ‘मोंथा’ का अर्थ सुगंधित फूल होता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मंगलवार शाम 7:23 बजे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर इसकी पुष्टि की।
आईएमडी के अनुसार, यह मौसम प्रणाली अगले कुछ घंटों में मछलीपट्टनम और कलिंगपट्टनम के बीच काकीनाडा के आस-पास आंध्र प्रदेश के तट को पार करेगी। इस दौरान अधिकतम 90 से 100 किमी प्रति घंटे की गति से हवा चलेगी, जिसकी गति 110 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
वहीं, पड़ोसी राज्य ओडिशा में चक्रवात ‘मोंथा’ की वजह से मंगलवार को भारी बारिश हुई, जिससे तटीय और दक्षिणी जिलों में भूस्खलन, घरों को नुकसान और कई जगह पेड़ उखड़ गए। कानगिरी, कोरापुट, रायगढ़ा, गजपति, गंजम, कंधमाल, कालाहांडी और नवरंगपुर सहित दक्षिणी ओडिशा के कुल 15 जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ है।
गजपति जिले के अनाका ग्राम पंचायत में पास की पहाड़ियों से बड़े-बड़े पत्थर गिरने से पांच गांवों की सड़कें अवरुद्ध हो गईं। रायगढ़ जिले के गुनुपुर, गुदारी और रामनागुड़ा इलाकों में भी पेड़ उखड़ने की सूचना है। गजपति जिले की पोतारा पंचायत में चक्रवात आश्रय स्थल के प्रबंधन में लगे एक आपूर्ति सहायक सुरेंद्र गमांग की सोमवार रात अचानक बीमार पड़ने से मौत हो गई। हालांकि, पुलिस ने अभी तक मौत के कारण की पुष्टि नहीं की है।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने आपदा के प्रभाव को कम करने के लिए राज्य की तैयारियों की समीक्षा की है और किसी भी तरह के जानमाल का नुकसान नहीं होने देने का लक्ष्य रखा है। प्रभावित लोगों को शरण देने के लिए 2,000 से ज्यादा चक्रवात आश्रय स्थल स्थापित किए गए हैं। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), ओडिशा आपदा मोचन बल (ओडीआरएएफ) और अग्निशमन सेवा के कर्मियों वाली 153 बचाव टीमें (6,000 से ज्यादा कर्मी) आठ दक्षिणी जिलों में संवेदनशील स्थानों पर तैनात हैं।









