अर्जुन झा/बकावंड। पड़ोसी राज्य ओड़िशा की सीमा से लगे बकावंड विकासखंड के गांवों के लोगों ने छठ महापर्व हर्षौल्लास से मनाया। मूलतः बिहार का यह पर्व अब बस्तर में भी लोकप्रिय हो चुका है। स्थानीय लोग भी व्रत रखकर छठी मैय्या और सूर्यदेव की उपासना करते हैं। धिंदगांव के राम मंदिर तालाब में छठ महापर्व का भव्य आयोजन किया गया। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दिया सूर्य देव को अर्ध्य दिया।भक्तिमय माहौल में छठी मैया की महिमा के गीत गूंजते रहे। ग्राम पंचायत और स्थानीय श्रद्धालुओं की सामूहिक पहल पर तैयार किए गए तालाब घाट पर सैकड़ों व्रती महिलाओं ने पूरे श्रद्धा और आस्था के साथ डूबते सूर्य को संध्या अर्ध्य अर्पित किया। तालाब को रंग-बिरंगे झालरों, तोरण पताकाओं, दीपों और केले के पत्तों से सजाया गया था।

व्रती महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में बांस की सुपलियों में ठेकुआ, फल, नारियल और गन्ने का प्रसाद सजाकर सूर्य देव को अर्पित किया। पूरे क्षेत्र में “केलवा जे भइल भोर भइया” जैसे पारंपरिक छठ गीतों की मधुर धुनों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। ग्राम पंचायत धिन्दगांव द्वारा सुरक्षा, साफ-सफाई और प्रकाश व्यवस्था के विशेष इंतज़ाम किए गए थे। युवाओं ने स्वयंसेवक के रूप में घाट पर श्रद्धालुओं की सहायता की। कार्यक्रम का समापन मंगलवार प्रातः उषा अर्घ्य के साथ किया गया। श्रद्धालुओं ने उगते सूर्य को अर्ध्य देकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। छठ महापर्व की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए ग्रामीणों ने इसे सामूहिकता और एकता का प्रतीक बताया।









