बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा
= विधायक विक्रम मंडावी ने इसे सुनियोजित धोखाधड़ी करार दिया =
= उच्च स्तरीय जांच और जमीन वापसी की मांग =
जगदलपुर। बस्तर संभाग में चले सलवा जुडुम अभियान के दौरान विस्थापित हुए लोगों की पैतृक जमीन अब उद्योगपतियों की गिद्ध दृष्टि पड़ गई। बीजापुर के विधायक विक्रम मंडावी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि बीजापुर जिले भैरमगढ़ राहत शिविरों में रह रहे पांच ग्रामीणों की कुल 109 एकड़ पैतृक भूमि रायपुर के उद्योगपति महेंद्र गोयनका ने भूस्वामियों को बहला-फुसलाकर खरीद ली है, जबकि भूस्वामियों को इसकी कोई जानकारी तक नहीं थी। विधायक ने इसे सुनियोजित धोखाधड़ी करार देते हुए उच्च स्तरीय जांच करने और जमीन की तत्काल वापसी की मांग डबल इंजन की सरकार से की है।

प्रेसवार्ता में विधायक विक्रम शाह मंडावी ने कहा कि प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन की सरकार बने दो वर्ष होने को हैं, तबसे लगातार हम यह बात कहते आ रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन की सरकार बनने के बाद भाजपा के संरक्षण में बस्तर के जल, जंगल और जमीन को लूटने का काम हो रहा है। भारतीय जनता पार्टी के संरक्षण उद्योगपतियों की नजर बस्तर के बहुमूल्य खनिज संसाधनों और बस्तर के जल, जंगल और जमीन पर है। वर्तमान में इन सभी बातों को लेकर बस्तर की जनता और हम सब चिंतित हैं। प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि अबूझमाड़ क्षेत्र से सटे बीजापुर जिले के ग्राम धर्मा, बैल, छोटेपल्ली और मरकापाल के निवासी सलवा जुडुम के दौरान अपने घर-गांव छोड़कर भैरमगढ़ राहत शिविरों में आकर रह रहे थे। इंद्रावती नदी के उस पार बसे इन गांवों के लोगों की पैतृक जमीन ही उनकी आजीविका का एकमात्र आधार थीं। लेकिन शिविरों में रहते हुए इन ग्रामीणों को यह भी पता नहीं चला कि उनकी बेशकीमती उपजाऊ भूमि को चोरी-छिपे बेच दिया गया। विक्रम मंडावी ने आगे कहा- जब भूस्वामियों को इसकी जानकारी मिली तो वे पूछताछ करने लगे तो पता चला कि रायपुर के उद्योगपति महेन्द्र गोयनका ने भूस्वामियों को बहला फुसलाकर अपनी बातों में फंसाया और सारी जमीन खरीद ली। इनसे न कोई सहमति ली गई और न ही किसी ने कोई जानकारी दी।धोखे में रखकर ग्रामीणों की जमीन की ख़रीदी बिक्री की गई। विधायक विक्रम मंडावी ने प्रेस वार्ता में प्रभावित भूस्वामियों के नाम और उनकी जमीन का पूरा ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि चेतन नाग पिता संपत नाग ग्राम धर्मा की कुल 12 एकड़, जमीन, घस्सू राम पिता लक्षिन्दर ग्राम बैल की कुल 29 एकड़ जमीन, पीला राम पिता गेटू ग्रामकी बैल की 18 एकड़, लेदरी सेठिया ग्राम छोटेपली की कुल 40 एकड़ और बीरबल पिता बेदे ग्राम मरकापाल की कुल 10 एकड़ मिला कर कुल 109 एकड़ जमीन हथिया ली गई है। श्री मंडावी ने कहा कि ये सभी ग्रामीण अशिक्षित हैं। इन्हें न कानून की जानकारी है, न दस्तावेजों की समझ। कोई भी व्यक्ति अपने जीवन भर की पूंजी को एक झटके में नहीं बेचता। पारिवारिक जरूरतों के लिए थोड़ी जमीन बेची जा सकती है, लेकिन पूरी पैतृक संपत्ति का सौदा असंभव है, यह स्पष्ट धोखाधड़ी है। विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि इंद्रावती नदी पर पुल बनने से अबूझमाड़ क्षेत्र से लगे इन गांवों का जन-जीवन धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है। ये ग्रामीण अपने मूल गांवों में लौटना चाहते हैं। लेकिन जब वे लौटने की तैयारी कर रहे थे, तभी उन्हें पता चला कि उनकी जमीनें किसी और की हो चुकी हैं। विक्रम मंडावी ने कहा- पुल बनने से रास्ता खुला, लेकिन घर लौटने का सपना टूट गया। यह सिर्फ जमीन का सौदा नहीं, जिले के मूल निवासियों के अस्मिता पर हमला है। विधायक विक्रम मंडावी ने यह भी कहा कि बीजापुर जिले में ऐसे कई और मामले सामने आ सकते हैं। उन्होंने कहा-“यह सिर्फ पांच परिवारों की बात नहीं पूरे क्षेत्र में चोरी-छिपे जमीनों की खरीद-फरोख्त हो रही है। विक्रम मंडावी ने आगे कहा कांग्रेस पार्टी आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर जन आंदोलन करेगी साथ ही उन्होंने इन मामले की उच्च स्तरीय जांच करने की मांग सरकार से की है। उन्होंने कहा कि जमीन खरीद और बिक्री की उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन हो, प्रभावित परिवारों को जमीन की तत्काल वापसी हो, धोखाधड़ी में शामिल लोगों पर कार्रवाई की जाए और आदिवासी क्षेत्रों में भूमि हस्तांतरण पर सख्त निगरानी रखी जाए। प्रेसवर्ता के दौरान पीड़ित परिवार और जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष लालू राठौर उपस्थित थे।









