Home चर्चा में जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष बनने से पूर्व ज्योतिषों की आई बाढ़ —...

जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष बनने से पूर्व ज्योतिषों की आई बाढ़ — संगठन सृजन पर सबकी नज़र

89
0
 जिला रिपोर्टर राजेन्द्र जायसवाल
 जिला जांजगीर चांपा छत्तीसगढ़ कांग्रेस में संगठन सृजन की प्रक्रिया अब निर्णायक दौर में पहुँच चुकी है। राहुल गांधी की सोच — “जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” — के सिद्धांत पर आधारित यह कवायद अब 33 जिलों के नए कांग्रेस जिला अध्यक्षों की नियुक्ति तक जा पहुँची है।
दिल्ली कांग्रेस हाईकमान ने इस बार पुराने तौर-तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है। न किसी बड़े नेता की खुली सिफारिश, न ही दिल्ली दरबार में टिकट-जैसी दौड़ — बल्कि एक गोपनीय रायसुमारी के ज़रिए जमीनी स्तर से संगठन के सच्चे प्रतिनिधि की तलाश की गई है।
गोपनीयता की दीवार और हाईकमान की रणनीति
दिल्ली कांग्रेस ने इस बार संगठन सृजन प्रक्रिया को पूरी तरह गोपनीय रखा है। पर्यवेक्षकों को भेजकर न सिर्फ नेताओं से बल्कि सामाजिक संगठनों, कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों से भी सुझाव लिए गए।
हर जिले से छह नामों का पैनल बनाकर दिल्ली भेजा गया है — जिसकी जानकारी राज्य के वरिष्ठ नेताओं तक को नहीं दी गई।
लेकिन, इस गोपनीयता ने ही कांग्रेस खेमे में ज्योतिषों और अटकलों की बाढ़ ला दी है। हर कोई अपने-अपने “सूत्रों” के हवाले से संभावित नाम बताने में लगा है। “किसका नाम होगा?” — यह सवाल आज हर कांग्रेस कार्यकर्ता के दिल में कौतूहल बनकर बैठा है।
जांजगीर-चांपा में चर्चाओं का दौर तेज़
जिला जांजगीर-चांपा में कांग्रेस जिला अध्यक्ष पद को लेकर जबरदस्त चर्चा चल रही है।
लगभग डेढ़ दर्जन नाम दावेदारी में बताए जा रहे हैं। इनमें से कुछ प्रमुख नाम हैं —
पूर्व विधायक मोतीलाल देवांगन
प्रदेश कांग्रेस सचिव गिरधारी यादव
हरप्रसाद साहू, प्रदेश कांग्रेस सचिव
संदीप यादव, पिछड़ा वर्ग कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष
चंद्रदेव महंत, महामंत्री पंचायती राज कांग्रेस
रामविलास राठौर, पूर्व पार्षद
गोपाल गुलशन सोनी,
दिनेश शर्मा, पूर्व जिला अध्यक्ष
मंजू सिंह, पूर्व जिला अध्यक्ष
राजेश अग्रवाल, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष
राघवेंद्र सिंह, पूर्व जिला पंचायत सदस्य
ऋषिकेश उपाध्याय, पूर्व नगर कांग्रेस अध्यक्ष
गौरव सिंह, युवा कांग्रेस प्रदेश सचिव
रमेश पैगवार, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष (अनुसूचित जाति)
भगवानदास गढ़ेवाल (अनुसूचित जाति)
आदिवासी वर्ग से किसी ने आवेदन नहीं किया है, जबकि पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग में मुकाबला कड़ा है।
राजनीतिक समीकरण और सामाजिक संतुलन
जांजगीर-चांपा जिले में अब तक अधिकांश जिला अध्यक्ष सामान्य वर्ग से रहे हैं — जैसे मालूराम केडिया, शिवप्रसाद शर्मा, वेदप्रकाश शर्मा, दिनेश शर्मा, मंजू सिंह और वर्तमान में राघवेंद्र सिंह।
हालाँकि कुछ समय के लिए पिछड़ा वर्ग और महिला वर्ग को भी प्रतिनिधित्व मिला, जैसे शशिकांता राठौर और रश्मि गबेल।
लेकिन इस बार समीकरण बदलते दिख रहे हैं।
भाजपा ने हाल ही में अनुसूचित जाति वर्ग से अबेश जागड़े को जिला अध्यक्ष बनाया है। ऐसे में कांग्रेस भी सामाजिक संतुलन के लिए पिछड़ा वर्ग को तरजीह दे सकती है।
इस दृष्टिकोण से गिरधारी यादव, हरप्रसाद साहू, और संदीप यादव जैसे नाम अधिक मजबूत दिखते हैं।
वरिष्ठता बनाम युवा सोच
राहुल गांधी के संगठन सृजन के सिद्धांतों के अनुसार, उदयपुर सम्मेलन में तय किया गया था कि 50% पदों पर युवाओं, महिलाओं, अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग को प्राथमिकता दी जाएगी।
इसके अलावा, “एक व्यक्ति–दो पद” की नीति पर भी अमल किया जाएगा।
इसलिए, जो पहले जिला अध्यक्ष रह चुके हैं, उन्हें दोबारा मौका मिलने की संभावना कम है।
युवा नेतृत्व की इस नई बयार में गौरव सिंह और संदीप यादव जैसे चेहरे भी पार्टी की नई सोच का प्रतिनिधित्व करते हैं।
वहीं, मोतीलाल देवांगन जैसे वरिष्ठ नेताओं का अनुभव भी अनदेखा नहीं किया जा सकता, यद्यपि उम्र और दोहराव का मुद्दा उनके सामने चुनौती बन सकता है।
पैसा, पहुँच या पात्रता — कौन जीतेगा बाजी?
कांग्रेस हाईकमान ने इस बार संगठन सृजन के माध्यम से एक पारदर्शी चयन प्रक्रिया का संदेश देने की कोशिश की है।
लेकिन जिले में चर्चाएँ कुछ और ही कहानी कह रही हैं —
क्या इस बार सच में योग्य और मेहनतकश कार्यकर्ता को ताजपोशी मिलेगी?
या फिर पैसा, पहुँच और प्रभाव ही अंतिम निर्धारक होंगे?
इन सवालों का जवाब आने वाले दिनों में तय होगा, लेकिन इतना तय है कि इस प्रक्रिया ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा और सजगता जरूर भर दी है।
भविष्य की दिशा
जिला अध्यक्ष की नियुक्ति केवल एक व्यक्ति का चयन नहीं है —
यह कांग्रेस संगठन के भविष्य की दिशा तय करने वाला निर्णय है।
अगर यह चयन योग्यता और निष्ठा के आधार पर होता है, तो कांग्रेस के लिए यह संगठन सृजन नहीं, संगठन पुनर्जागरण साबित होगा।
लेकिन यदि चयन दबाव या सिफारिशों की भेंट चढ़ा, तो कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट सकता है।
जो भी हो —
अब सबकी निगाहें दिल्ली हाईकमान पर टिकी हैं।
कौन बनेगा कांग्रेस का नया चेहरा जांजगीर-चांपा में?
यह फैसला अचानक होगा, लेकिन इसका असर लंबे समय तक महसूस किया जाएगा।
राहुल गांधी की सोच के अनुरूप “संगठन सृजन” केवल पद वितरण नहीं, बल्कि नए भारत की कांग्रेस के निर्माण की दिशा में एक प्रयोग है।
राहुल गांधी की सोच के अनुरूप “संगठन सृजन” केवल पद वितरण नहीं, बल्कि नए भारत की कांग्रेस के निर्माण की दिशा में एक प्रयोग है।
अब देखना यह है कि जांजगीर-चांपा की मिट्टी से कौन-सा राजनीतिक हीरा निकलकर आता है —
जिसे कांग्रेस अपने कोहिनूर के रूप में तराश सके।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here