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एनएमडीसी नगरनार स्टील प्लांट की संवेदनहीनता चौराहे पर, कम ऑक्सीजन के साथ रेफर किया मरीज को, रास्ते में हो गई मौत

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-अर्जुन झा-
नगरनार। एनएमडीसी स्टील प्लांट नगरनार के सीएसआर हॉस्पिटल के कर्ताधर्ताओं की लापरवाही ने एक होनहार युवक की जान ले ली। हॉस्पिटल की एंबुलेंस के ऑक्सीजन सिलेंडर की ऑक्सीजन रास्ते में खत्म हो गई और उसी के साथ घायल युवक की सांसें भी थम गईं। यह घटना एनएमडीसी प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर गई है।
ग्राम भेजापदर निवासी धनपति कश्यप का युवा पुत्र हरीश कश्यप सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गया था। हरीश को एनएमडीसी नगरनार स्टील प्लांट के हॉस्पिटल में दो दिन पहले भर्ती कराया गया था। हरीश की हालत बिगड़ने पर उसे अपोलो अस्पताल विशाखापट्टनम रेफर किया गया था।

हरीश को एनएमडीसी हॉस्पिटल की एंबुलेंस से विशाखापट्टनम रवाना किया गया था, किंतु एंबुलेंस प्रभारी डॉ विजय कुमार नक्का की लापरवाही से जो एंबुलेंस दी गई थी उसमें लगे ऑक्सीजन सिलेंडर में ऑक्सीजन की मात्रा बहुत कम थी। लिहाजा विशाखापट्टनम पहुंचने से पहले ही सिलेंडर खाली हो गया और हरीश ने रस्ते में ही तड़प तड़प तड़प कर दम तोड़ दिया। यह घटना केवल लापरवाही का उदाहरण नहीं है, बल्कि मानवीय संवेदना के साथ खिलवाड़ करने वाली भी साबित हुई है। जिन ग्रामीणों की जमीन पर नगरनार स्टील प्लांट की एनएमडीसी ने स्थापना की है, उन्हीं ग्रामीणों की जान और सेहत से खिलवाड़ अब एनएमडीसी प्रबंधन करने लगा है। अगर प्रबंधन पूरी पड़ताल के बाद पर्याप्त सुविधाओं के साथ एंबुलेंस को रवाना किया होता, तो शायद हरीश की जान बच सकती थी। इस घटनाक्रम ने एनएमडीसी और नगरनार स्टील प्लांट प्रबंधन की संवेदन शून्यता को चौराहे पर खड़ा कर दिया है। इसे लेकर परिजनों और ग्रामीणों में रोष देखा जा रहा है।

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