आज 5 नवंबर 2025 को उपराष्ट्रपति महोदय के हाथों अग्रज डा.चित्तरंजन कर को पं. सुंदरलाल शर्मा सम्मान प्रदान किया जाएगा।
कुछ लोग किसी सम्मान के कारण सम्मानित होते हैं। किंतु कुछ कालजयी हस्ताक्षर ऐसे भी होते हैं। जिनके कारण सम्मान स्वयं सम्मानित होता है।
डा.चित्तरंजन कर किसी परिचय के मुंहताज नहीं हैं। भाषाविद्,वरिष्ठ साहित्यकार, मूर्धन्य,उद्भट् विद्वान्, मनीषी जैसे संबोधन डा.कर जैसे अक्षांश के साथ ही फबते हैंएम.ए.( हिंदी, भाषाविज्ञान, अंग्रेजी) , पी.एच.डी. , डी.लिट् जैसी उपाधियां भी डा.कर के साथ स्वयं गौरवान्वित होती हैं।
आपने हिंदी व्याकरण पर डी.लिट् किया है और इन दिनों गंभीरतापूर्वक हिंदी का नव्य -भव्य व्याकरण भी रच रहे हैं।
आप समर्थ कवि , गीतकार, ग़ज़लगो, लेखक, समीक्षक प्रभृति के साथ प्रखर वक्ता और संगीतकार भी हैं। हिंदी , अंग्रेजी और छत्तीसगढ़ी से संबंधित आपकी 40 से अधिक कृतियां प्रकाशित हुई हैं और अनेक पांडुलिपियां प्रकाशन की बाट जोह रहीं हैं।
एक जीवन में तीन विषयों के प्रोफेसर होने का रिकार्ड भी आपके नाम समय की शिलालेख पर दर्ज है।
आप राजीव लोचन महाविद्यालय राजिम में हिंदी पढ़ाते रहे। फिर वर्षों तक पं. रविशंकर विश्वविद्यालय रायपुर में भाषाविज्ञान की वैज्ञानिकता को रेखांकित करते हुए साहित्य एवं भाषा अध्ययन शाला के अध्यक्ष पद से निवृत्त हुए।
रिटायर्ड बट नाट टायर्ड को चरितार्थ करते हुए आप निवृत्ति उपरांत गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय एवं केंद्रीय विश्वविद्यालय कोरापुट में अंग्रेजी भाषा पर अपने अधिकार का साक्ष्य प्रदर्शित करते रहे।
आपकी प्रतिभा, क्षमता, अर्हता और विनम्रता तथा शालीनता को देखते हुए ” विद्या विनयेन शोभते” उक्ति चरितार्थ प्रतीत होती है।
जहां छत्तीसगढ़ के उदय के साथ ही नियुक्तियों, उपाधियों, सम्मानों तथा पुरस्कारों पर प्रश्नचिन्ह उगते रहे हैं , वहीं इस वर्ष आपको पं. सुंदरलाल शर्मा सम्मान प्रदान करने के निर्णय से सम्मान स्वयं सम्मानित हो रहा है।
प्रणम्य अग्रज राहत इंदौरी के खूबसूरत शेर के साथ आपको बधाइयां सौंप रहा हूं –
ये अलग बात है ख़ामोश खड़े रहते हैं
फिर भी जो लोग बड़े हैं वो बडे रहते हैं









