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चार सूत्रीय मांगों को लेकर सहकारी कर्मचारी संघ की अनिश्चितकालीन हड़ताल, धान खरीदी पर बहिष्कार करने की चेतावनी ,

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बिलासपुर संवाददाता – रोशनी सोनी 

छत्तीसगढ़ में इस साल 15 नवंबर से धान खरीदी की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। लेकिन खरीदी से पहले ही राज्य सरकार के सामने एक नई मुश्किल खड़ी हो गई है। सहकारी समिति कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठकर सरकार से अपनी लंबित मांग पूरी होने की राह देख रहे है ।

महासंघ और समर्थन मूल्य धान खरीदी ऑपरेटर संघ ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनकी लम्बित मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो वे धान खरीदी अभियान का बहिष्कार करेंगे।

ज्ञापन सौंपकर जताया विरोध

दोनों संगठनों के प्रतिनिधियों ने विभिन्न जिलों में कलेक्टरों के नाम ज्ञापन सौंपकर सरकार को अपनी मांगों और समस्याओं से अवगत कराया। उनका कहना है कि वे पहले भी कई बार शासन-प्रशासन को अपनी समस्याओं के बारे में बता चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
कर्मचारियों ने साफ कहा है कि अगर सरकार ने जल्द कोई समाधान नहीं निकाला, तो वे धान खरीदी में भाग नहीं लेंगे। इससे राज्यभर में धान खरीदी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर लाखों किसानों पर पड़ेगा जो अपनी उपज बेचने की तैयारी कर रहे हैं।

संघ की प्रमुख मांगें

संघों ने सरकार से कई वित्तीय और नीतिगत सुधारों की मांग की है, जिनमें प्रमुख बिंदु हैं:

1. परिवहन, सुखत की पूरी राशि, शॉर्टेज प्रोत्साहन और अन्य प्रशासनिक खर्चों का पूर्ण भुगतान।

2. आउटसोर्सिंग नीति समाप्त कर कर्मचारियों को नियमित पदों पर समायोजित किया जाए।

3. मध्यप्रदेश की तर्ज पर समितियों को तीन लाख रुपये वार्षिक प्रबंधकीय अनुदान प्रदान किया जाए।

4. कर्मचारियों के लिए भविष्य निधि (PF), महंगाई भत्ता (DA) और ईएसआईसी जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं लागू की जाएं।

किसानों की चिंता बढ़ी

कर्मचारियों की चेतावनी के बाद किसानों में भी चिंता बढ़ गई है। धान की कटाई लगभग पूरी हो चुकी है और किसान अपनी फसल बेचने की तैयारी में हैं। अगर खरीदी प्रक्रिया समय पर शुरू नहीं हुई, तो किसानों को फसल भंडारण और भुगतान में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
सरकार के लिए परीक्षा की घड़ी

अब सरकार के सामने दोहरी चुनौती है—एक ओर किसानों को समय पर धान खरीदी की सुविधा देना और दूसरी ओर समितियों के कर्मचारियों की नाराजगी को दूर करना।
राज्य सरकार ने संकेत दिए हैं कि कर्मचारियों की समस्याओं पर विचार किया जा रहा है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

यदि आने वाले दिनों में दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनती, तो यह विवाद धान खरीदी अभियान की शुरुआत पर असर डाल सकता है, जिससे राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।

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