रतनपुर संवाददाता – विमल सोनी
रतनपुर:
भारतीय कलचुरी जायसवाल समवर्गीय महासभा के तत्वावधान में 9 नवंबर को मां महामाया मंदिर प्रांगण, रतनपुर (बिलासपुर) में विशाल कलचुरी-कलार सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इस ऐतिहासिक आयोजन का प्रमुख उद्देश्य समाज की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त बनाना, संगठनात्मक एकता को मजबूत करना तथा सामाजिक-राजनीतिक स्तर पर कलचुरी समाज की प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराना है।
महासभा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष ने बताया कि समाज को एकजुट करने एवं संगठित पहचान कायम करने के लिए यह सम्मेलन मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि यदि समाज एक मंच पर संगठित होकर कार्य करेगा, तो इसका असर शासन-प्रशासन और राजनीतिक स्तर पर भी मजबूती से देखने को मिलेगा। इस महोत्सव का आयोजन समाज की कुलदेवी मां महामाया के मंदिर प्रांगण में किया जा रहा है, जो सामाजिक श्रद्धा और परंपराओं का प्रतीक है।

सम्मेलन के माध्यम से समाज की कला, संस्कृति, परंपरा और गौरवगाथा का व्यापक प्रदर्शन किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, समाज के विभिन्न संगठनों को एक मंच पर लाकर आगामी पीढ़ी को गौरवशाली इतिहास से जोड़ना तथा राज्य को कलचुरी परंपरा की समृद्ध विरासत से अवगत कराना इसका मुख्य उद्देश्य है। कार्यक्रम की शुरुआत कुलदेवी महामाया की आराधना, माता बहादुर कलारिन व सहस्त्रबाहु जी की विशेष पूजा-अर्चना से होगी। इसके पश्चात समाज की परंपरा, कला एवं संगीत की विविध प्रस्तुतियाँ और वरिष्ठजनों की गोष्ठी आयोजित की जाएगी।
आयोजन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि रहेंगे, जबकि मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, विजय शर्मा, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, विधायक अमर अग्रवाल सहित अनेक राजनीतिक व सामाजिक गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। आयोजन समिति के मनोज राय, अशोक जायसवाल, मोहित जायसवाल, रमेश जायसवाल, शैलेंद्र जायसवाल, संजय महोबे, सुरेंद्र जायसवाल एवं पेशीराम जायसवाल ने बताया कि यह आयोजन समाज की एकता, संस्कृति, धरोहर और आत्मसम्मान का प्रतीक बनेगा।
सम्मेलन के माध्यम से कलचुरी समाज नई ऊर्जा व एकता के साथ राज्य में अपनी अलग पहचान स्थापित करने की ओर अग्रसर है









