Home चर्चा में सच्चाई बोलना पड़ा भारी: किताबों की कमी उजागर करने पर शिक्षक निलंबित

सच्चाई बोलना पड़ा भारी: किताबों की कमी उजागर करने पर शिक्षक निलंबित

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रायपुर संवाददाता – रघुराज
धमतरी। शिक्षा विभाग की खामियों को उजागर करना कुरूद ब्लॉक के एक सहायक शिक्षक को भारी पड़ गया। ग्राम नारी में पदस्थ सहायक शिक्षक ढालूराम साहू को केवल इतना करने पर निलंबित कर दिया गया कि उन्होंने अपने व्हाट्सएप स्टेटस में स्कूल में बच्चों को हिंदी की किताबें नहीं मिलने की शिकायत की थी। यह स्टेटस जैसे ही वायरल हुआ, जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने तत्काल प्रभाव से उनका निलंबन आदेश जारी कर दिया।
मिली जानकारी के अनुसार, ढालूराम साहू पिछले कई वर्षों से ग्राम नारी प्राथमिक शाला में पदस्थ हैं। कुछ दिनों से वे स्कूल में बच्चों को पाठ्यपुस्तकें नहीं मिलने की समस्या से परेशान थे। उन्होंने विभागीय स्तर पर इसकी जानकारी देने की कोशिश की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात रखने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने व्हाट्सएप स्टेटस में लिखा कि जब राज्योत्सव के मंच चमक और सजावट से जगमगा रहे हैं, तब गांव के बच्चे अब तक हिंदी की किताबों के लिए तरस रहे हैं।
ढालूराम का यह स्टेटस गांव और आसपास के शिक्षकों के व्हाट्सएप ग्रुप में वायरल हो गया। लोगों ने उनकी बात का समर्थन भी किया। लेकिन इस वायरल पोस्ट पर शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए इसे “विभागीय मर्यादा का उल्लंघन” बताया। डीईओ ने तत्काल आदेश जारी करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया और उनके खिलाफ जांच के निर्देश दिए।
इस कार्रवाई के बाद शिक्षा जगत में दो तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ अधिकारियों ने कहा कि सरकारी कर्मचारी होने के नाते ढालूराम साहू को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी। वहीं, बड़ी संख्या में शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया। स्थानीय शिक्षकों का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय समस्या को दूर किया जाना चाहिए।
गांव के सरपंच और अभिभावकों ने भी इस घटना पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि शिक्षक ने कोई गलत बात नहीं की, बल्कि जिस सच्चाई को सब जानते हैं, वही सबके सामने रखी। बच्चों को किताबें न मिलना गंभीर लापरवाही है। ऐसे में शिक्षक को निलंबन देने से बाकी शिक्षकों में डर का माहौल बनेगा।
इधर, शिक्षकों के संगठनों ने इस मामले में शिक्षा विभाग से निलंबन वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि ढालूराम साहू ने किसी की छवि खराब नहीं की, बल्कि बच्चों के भविष्य की चिंता जाहिर की थी। संगठनों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकार का हनन बताया और जल्द न्याय की उम्मीद जताई।
इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि क्या सरकारी व्यवस्था में सच्चाई बोलना अब भी ‘अपराध’ माना जाता है?

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