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जिन डीएड अभ्यर्थी को नियुक्ति देने के लिए बीएड वालों को निकाला, उन डीएलएड अभ्यर्थियों को नियुक्त करना भूले

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 शिक्षकों के 2300 पद रिक्त 
विरोध में सैकड़ों की संख्या में सहायक शिक्षक अभ्यर्थियों ने घेरा शिक्षा मंत्री निवास
डीएलएड अभ्यर्थियों ने सहायक शिक्षक के शेष 2300 पदों पर नियुक्ति प्रकिया शीघ्र प्रारंभ करने की मांग को लेकर रविवार को शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव जी का निवास घेरा
 मंत्री के दुर्ग जिले में स्थित निवास का घेराव करने बड़ी संख्या में जांजगीर चांपा जिला और पूरे छत्तीसगढ़ से भी युवा पहुंचे। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्राथमिक कक्षाओं के अध्यापन के लिए डीएलएड डिग्री अनिवार्य कर दी गई है। सहायक शिक्षक के पदों पर नियुक्त किए गए बीएड डिग्रीधारियों को विभाग द्वारा पद से हटाना पड़ा। इन रिक्त हुए पदों पर डीएलएड अभ्यर्थियों की नियुक्ति की जानी थी, लेकिन अब तक डीएड अभ्यर्थी को नियुक्ति नहीं दिए और जिनको सुप्रीम कोर्ट के डबल बेंच और हाई कोर्ट के डबल बेंच ने निकाला उनको असंवैधानिक रूप से विज्ञान प्रयोगशाला में समायोजन करके उनका नौकरी सुरक्षित कर दिया लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि सर्वोच्च न्यायालय ने जिनको नियुक्ति देने के लिए निकाला, उन डीएड अभ्यर्थियों को विभाग और सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय का आदेश का अवहेलना करते हुए अभी तक डीएड अभ्यर्थी को नियुक्ति नहीं दिया गया
 नवीन शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने के बाद भी भर्ती संबंधित कोई प्रक्रिया प्रारंभ नहीं की जा सकी है। अंततः डीएलएड अभ्यर्थी भी अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतर आए हैं।
न्यायालय ने दिया है 2 माह का समय
अभ्यर्थियों ने कहा है कि बार-बार मांग उठाने और विभागीय स्तर पर कई बार आवेदन देने के बावजूद अब तक स्पष्ट निर्णय नहीं हुआ। विभाग की लापरवाही के कारण योग्य एवं शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण अभ्यथियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। इस मुद्दे पर पीड़ित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। उच्च न्यायालय ने 26 सितंबर 2025 के अपने आदेश में दो माह के भीतर रिक्त 2300 पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूर्ण करने निर्देश दिए, लेकिन 45 दिन हो जाने पर भी विभाग द्वारा काउंसिलिंग के संदर्भ में किसी तरह की अधिसूचना जारी नहीं की गई है। कम संख्या में काउंसिलिंग कर अनावश्यक देरी
अभ्यर्थियों का कहना है कि विभाग द्वारा 1:1 के अनुपात में अर्थात 1 पद पर 1 ही अभ्यर्थी को काउंसिलिंग के लिए बुलाकर अनावश्यक विलंब किया जाता है। उनकी मांग है कि डीएड वालो का दूसरा चरण की कांउसलिंग प्रकिया 1:3 के अनुपात में कराया जाए ताकि दो माह के अंदर 2300 पदों को भरा जा सके। अभ्यर्थियों का कहना है कि न्यायालय के आदेश एवं पद रिक्त होने के पश्चात भी अभी तक विभाग की ओर से कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है। उनका कहना है, कई बार कैबिनेट मंत्रियों एवं जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर चुके अभ्यर्थियों को केवल आश्वासन ही मिला था।
और दुर्भाग्य की बात यह है कि 2300 पद में लगभग 1600 से अधिक पद आदिवासी वर्ग के अभ्यर्थियों का पद रिक्त है और छत्तीसगढ़ में आदिवासी मुख्यमंत्री और देश में आदिवासी राष्ट्रपति के होते हुए भी आदिवासी युवाओं को शिक्षा रोजगार के लिए सड़क पर आना पड़ रहा है और रोजगार से वंचित करके इनका शोषण किया जा रहा है
डीएड संघ छत्तीसगढ़

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