बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा
बकावंड ब्लॉक में सक्रिय रेत माफिया पर नकेल कसने में प्रशासन विफल
बकावंड: विकासखंड बकावंड में रेत माफिया ग्रामीणों के सीने पर मूंग दलते हुए नदियों का सीना छलनी एवं सड़कों की दुर्दशा कर रहे हैं और शासन को लाखों का चूना लगा रहे हैं। वहीं बस्तर जिला प्रशासन और खनिज विभाग के अधिकारी रेत माफिया पर नकेल कसने में विफल साबित हो रहे हैं।
बकावंड ब्लाक की ग्राम पंचायत बजावंड और बनियागांव में ओड़िशा से आई भस्कली नदी और इंद्रावती नदी में रेत का अवैध खनन एवं परिवहन धड़ल्ले से चल रहा है। ओड़िशा के और कई स्थानीय रेत माफिया बड़े पैमाने पर इन नदियों से रेत निकाल रहे हैं। रेत खनन के लिए भारी भरकम मशीनों का और परिवहन के लिए हाईवा, डंपर, 16 एवं 18 चक्कों वाले बड़े ट्रकों तथा ट्रैक्टरों का उपयोग किया जाता है। इन नदियों से निकाली जाने वाली रेत ओड़िशा और बस्तर के कई गांवों एवं नगरों में खपाई जा रही है। रेत परिवहन के लिए बजावंड, बनियागांव, तारापुर, बेलगांव, नगरनार समेत अन्य गांवों की अंदरूनी सड़कों का उपयोग किया जाता है। रेत लदे भारी वाहनों के दबाव से इन तमाम गांवों की सड़कों की हालत बहुत ज्यादा खराब हो चली है। इन बदहाल सड़कों पर ग्रामीणों का चल पाना मुश्किल हो गया है। अभी धान कटाई का सीजन चल रहा है। किसान खेतों से धान फसल काटकर गांव में स्थित खलिहानों तक बैलगाड़ी व ट्रैक्टरों के माध्यम से लाते हैं। सड़कें खराब हो जाने से फसल का परिवहन किसान नहीं कर पा रहे हैं। किसान और ग्रामीण परेशान हो चले हैं। उधर भास्कली नदी में रेत के बेतहाशा दोहन से नदी की जलधारा की दिशा बदल गई। नदी के पानी का बहाव बस्तर जिले के गांवों की दिशा में होने लगा है। इससे इन गांवों की खेती की जमीन का तेजी से कटाव हो रहा है। आलम यह है कि बनियागांव के कई किसानों की पूरी कृषि भूमि नदी में समा चुकी है।
कार्रवाई के नाम पर दिखावा
प्रभावित गांवों के किसान और ग्रामीण बकावंड एसडीएम, जिला प्रशासन और खनिज विभाग से कई बार कर चुके हैं। अधिकारी कार्रवाई के नाम पर सिर्फ मामूली खानापूर्ति कर लौट जाते हैं। बनियागांव में एसडीएम ने रेत खनन में प्रयुक्त एक भारी मशीन को जप्त कर स्थानीय पंचायत के सुपुर्द किया था। मशीन मालिक और संबंधित रेत माफिया पर कोई कार्रवाई आज तक नहीं हुई है। वहीं जब प्रशासन की टीम कभी रेत माफियाओं को रंगे हाथ पकड़ने जाती है, तो इसकी भनक पहले ही रेत माफियाओं को लग जाती है। चर्चा है कि खनिज विभाग के स्थानीय कर्मचारी और कुछ ग्रामीण रेत माफियाओं के लिए मुखबिरी करते हैं और छापेमारी से पहले ही उन्हें अलर्ट कर देते हैं। इस वजह से वे पकड़ में नहीं आ पाते।









