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तुर्की ने अचानक एयरस्पेस क्लियरेंस रद्द कर भारतीय अपाचे हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी रोकी, दोनों देशों के रिश्तों में तनाव नई ऊँचाई पर

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भारतीय सेना के लिए खरीदे गए अमेरिकी अपाचे AH-64E हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति अचानक अटक गई है, और इसके पीछे तुर्की की कड़ी आपत्तियों को कारण बताया जा रहा है। बोइंग द्वारा भारत के लिए भेजे जा रहे कुल छह हेलीकॉप्टरों में से तीन जुलाई 2025 में पहुंच चुके थे, लेकिन शेष तीन की नवंबर में होने वाली डिलीवरी तुर्की के एयरस्पेस में अनुमति रद्द होने के बाद रोक दी गई। यह कदम दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव का संकेत माना जा रहा है।

एयरस्पेस क्लियरेंस रद्द, कार्गो विमान को लौटना पड़ा

प्लेन ट्रैकर्स के अनुसार, 30 अक्टूबर को यूक्रेन का मालवाहक विमान An-124 जर्मनी से उड़कर अमेरिका पहुंचा था, जहां भारतीय सेना के रंग में तैयार तीन अपाचे हेलीकॉप्टरों को इसमें लोड किया गया। विमान 1 नवंबर को उड़ान भरकर इंग्लैंड पहुंचा, लेकिन भारत की ओर बढ़ने के बजाय आठ दिन वहीं रुका रहा।
8 नवंबर को अचानक विमान को वापस अमेरिका लौटने का आदेश मिला। आधिकारिक वजह “लॉजिस्टिक समस्या” बताई गई, लेकिन कई स्रोतों ने पुष्टि की कि तुर्की ने अंतिम क्षण में अपने एयरस्पेस की अनुमति वापस ले ली थी। विमान के लौटने के बाद हेलीकॉप्टरों को ट्रकों से उतराकर सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।

भारत–तुर्की रिश्तों में तनाव की पृष्ठभूमि

मई 2025 में पाकिस्तान के साथ चार दिवसीय संघर्ष के दौरान तुर्की ने खुले तौर पर इस्लामाबाद का समर्थन किया था, जिससे द्विपक्षीय रिश्ते और बिगड़ गए। तुर्की ने न केवल भारत की ओर से चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की तीखी आलोचना की थी, बल्कि पाकिस्तान को सैन्य उपकरण भी भेजे थे।

राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन कई बार संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर का मुद्दा उठाते रहे हैं, जिसे भारत अपनी संप्रभुता पर हस्तक्षेप के रूप में देखता है। इसी पृष्ठभूमि में अपाचे हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी रोके जाने को विशेषज्ञ दोनों देशों के बीच नई राजनीतिक रस्साकशी का हिस्सा मान रहे हैं।

भारत के लिए रणनीतिक चुनौती

बोइंग ने डिलीवरी रोकने को “साधारण तकनीकी बाधा” बताया है, लेकिन कूटनीतिक हलकों का मानना है कि यह कदम तुर्की की राजनीतिक असहमति का परिणाम है। भारतीय सेना की एविएशन ब्रिगेड के लिए ये अपाचे हेलीकॉप्टर अत्यंत महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं। देरी से सैन्य तैयारियों पर प्रभाव पड़ सकता है।

सरकार ने इस मामले में अभी औपचारिक बयान जारी नहीं किया है, हालांकि सूत्रों का कहना है कि भारत डिलीवरी के लिए वैकल्पिक मार्गों और लॉजिस्टिक विकल्पों का मूल्यांकन कर रहा है।

 

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