Air Pollution & Migraine: बिगड़ती एयर क्वालिटी अब सिर्फ फेफड़ों की नहीं, बल्कि दिमाग और नर्व सिस्टम की भी सबसे बड़ी दुश्मन बनती जा रही है। हवा में मौजूद हानिकारक कण—जैसे PM2.5, PM10, नाइट्रोजन ऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड—शरीर में सूजन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और ऑक्सीजन की कमी पैदा करते हैं। यही वजह है कि खराब हवा के दिनों में सिरदर्द और माइग्रेन के मामलों में अचानक बढ़ोतरी देखी जाती है।
प्रदूषण कैसे बढ़ाता है सिरदर्द और माइग्रेन?
1) ऑक्सीजन की कमी- जब हवा ज़हरीले कणों से भर जाती है, तो दिमाग तक ऑक्सीजन का प्रवाह कम हो जाता है। इससे भारीपन, चक्कर और सिरदर्द जैसी समस्याएँ बढ़ जाती हैं।
2) सूजन और नर्व ट्रिगर- प्रदूषण शरीर की इन्फ्लेमेशन बढ़ाता है, जिससे माइग्रेन अटैक जल्दी ट्रिगर होते हैं।
3) साइनस पर असर- धूल और केमिकल कण नाक व साइनस को सूजन करते हैं। इससे प्रेशर बढ़ता है और साइनस हेडेक की समस्या हो जाती है।
4) कार्बन मोनोऑक्साइड का प्रभाव- यह जहरीली गैस हल्के सिरदर्द से लेकर चक्कर, थकान और मानसिक धुंध (brain fog) तक पैदा कर सकती है।
किसे सबसे ज्यादा खतरा?
माइग्रेन या क्रॉनिक सिरदर्द वाले लोग
बच्चे व बुजुर्ग
दमा, एलर्जी या साइनस वाले व्यक्ति
वे लोग जो लंबे समय तक बाहर रहते हैं
प्रदूषण से सिरदर्द से कैसे बचें? (Easy Tips)
1) N95/KN95 मास्क जरूर पहनें- ये हवा में मौजूद छोटे-छोटे कणों को रोकते हैं और सिरदर्द के जोखिम को कम करते हैं।
2) घर में एयर प्यूरीफायर चालू रखें- खासकर तब, जब AQI खराब या बहुत खराब श्रेणी में हो।
3) हाइड्रेटेड रहें- प्रदूषण डिहाइड्रेशन बढ़ाता है, जो सिरदर्द को और खराब कर सकता है। पानी, नारियल पानी या हर्बल ड्रिंक लें।
4) भाप लें- साइनस में जमा गंदगी साफ होती है और सिरदर्द से राहत मिलती है।
5) इम्यूनिटी बढ़ाने वाले पेय- नींबू पानी, अदरक-शहद, तुलसी या गर्म पानी के साथ शहद—सूजन और इरिटेशन कम करने में मददगार।
6) बाहर जाने से पहले AQI देखें- AQI 200 से ज्यादा हो तो बाहर कम समय बिताएँ या समय बदलें।
7) आँखों की सुरक्षा करें- प्रदूषित हवा आँखों में जलन लाती है, जिससे सिरदर्द बढ़ सकता है। डॉक्टर द्वारा सुझाए आई ड्रॉप्स का उपयोग फायदेमंद है।









