दंतेवाडा संवाददाता – रिकेश्वर राणा
दंतेवाड़ा। विकास के दावों के बीच जमीनी हकीकत कभी-कभी दर्द की तरह सामने आ जाती है। दंतेवाड़ा जिले के सुरनार गांव के ओमलपारा में सड़क न होने की वजह से आज भी ग्रामीणों को बीमार परिजनों को कंधे और उल्टी खाट में उठाकर किलोमीटरों पैदल चलना पड़ता है। ताज़ा मामला इसी गांव का है, जहां एक ही परिवार के दो बीमार बुजुर्गों को 7 किलोमीटर दूर अस्पताल पहुंचाने के लिए परिजनों को घंटों जंगल-पहाड़ पार करना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, बुजुर्ग पोदीया मंडावी और उनकी पत्नी कोशा की तबीयत अचानक बिगड़ गई। गांव में सड़क न होने के चलते परिजन मजबूर हो गए और उन्हें कावड़ की तरह बनाई गई उल्टी खाट में बिठाकर और दूसरे मरीज को कंधे पर उठाकर पैदल ही अस्पताल की ओर चल पड़े। लगभग 5 घंटे तक यह कठिन सफर जारी रहा—कभी चढ़ाई, कभी फिसलन, तो कभी बैठकर आराम… क्योंकि रास्ता बेहद खराब और ऊबड़-खाबड़ है।
परिजन राकेश मंडावी ने बताया कि वे कई बार कलेक्टर और प्रशासन को आवेदन दे चुके हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला है।
“पहले नक्सल समस्या थी, अब गांव नक्सलमुक्त है। फिर भी सड़क नहीं बनी। अब हम युवा सड़क के लिए आंदोलन करेंगे,”—उन्होंने कहा।
ओमलपारा की सरपंच रिंकी मंडावी ने भी सड़क निर्माण की मांग उठाई। उनका कहना है—
“सालों से आवेदन दे रहे हैं। अधिकारी कहते हैं सड़क बन जाएगी, लेकिन काम शुरू ही नहीं होता। सबसे बड़ी परेशानी इसी सड़क की वजह से है।”
ग्रामीण गंगा ने बताया कि बीमार मरीज को पिछले 15 दिनों से तेज बुखार है।
“मजबूरी में 5 घंटे से मरीज को लेकर चल रहे हैं। गांव तक सड़क ही नहीं है,”—उन्होंने कहा।
यह इलाका एक समय नक्सलियों के प्रभाव में था, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। फिर भी ग्रामीणों के लिए सड़क का इंतजार खत्म नहीं हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने से इलाज, शिक्षा और आवागमन की सबसे बड़ी समस्या दूर हो जाएगी, लेकिन प्रशासन की उदासीनता से लोग आज भी पीड़ा झेलने को मजबूर हैं।









