रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की आगामी भारत यात्रा से पहले भू-राजनीतिक मंच पर बड़ा मोड़ देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने एक मजबूत कूटनीतिक संकेत देते हुए रूस के साथ कई अहम समझौतों की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ाए हैं। माना जा रहा है कि पुतिन की दिल्ली यात्रा के दौरान दोनों देश कई बड़ी डील पर हस्ताक्षर कर सकते हैं, जिन पर लंबे समय से बातचीत चल रही थी।
मोदी सरकार और रूस में तेज़ी से बढ़ रही तैयारियाँ
सूत्रों के मुताबिक भारत और रूस आने वाले हफ्तों में कई रणनीतिक परियोजनाओं और द्विपक्षीय समझौतों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। इसी कड़ी में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर सोमवार (17 नवंबर) को मॉस्को पहुंचे, जहाँ उन्होंने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ विस्तृत बातचीत की।
दोनों नेताओं की बैठक में रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग, और वैश्विक शांति प्रयासों पर खास जोर दिया गया।
“पुतिन की यात्रा बेहद अहम”—जयशंकर
मॉस्को में अपने आरंभिक संबोधन में जयशंकर ने कहा:
“यह दौरा हमारे लिए खास महत्व रखता है, क्योंकि हम राष्ट्रपति पुतिन की 23वें वार्षिक भारत-रूस शिखर वार्ता के लिए तैयारी कर रहे हैं।”
“कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौते, परियोजनाएँ और पहलें चर्चा के अंतिम चरण में हैं और हमें उम्मीद है कि जल्द ही इन्हें पुख़्ता रूप मिल जाएगा।”
जयशंकर ने आगे यह भी बताया कि आने वाले समझौते भारत-रूस की विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देंगे।
यूक्रेन युद्ध पर भारत की साफ स्थिति
बैठक के दौरान जयशंकर ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर भारत की भूमिका स्पष्ट की। उन्होंने कहा:
“भारत शांति स्थापित करने और तनाव कम करने के हालिया प्रयासों का समर्थन करता है।”
“हम चाहते हैं कि सभी पक्ष वार्ता और समाधान की दिशा में सकारात्मक कदम बढ़ाएँ।”
यह बयान वैश्विक राजनीतिक समीकरणों के बीच भारत की संतुलित और जिम्मेदार भूमिका को दर्शाता है।
दिसंबर में पुतिन की भारत यात्रा, कई बड़े फैसलों पर मुहर संभव
सूत्रों के अनुसार राष्ट्रपति पुतिन की यात्रा 5 दिसंबर के आसपास तय मानी जा रही है।
इस दौरान:
वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन होगा
रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, अंतरिक्ष और तकनीकी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण समझौतों की घोषणा हो सकती है
द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने वाले कई परिणाम सामने आने की उम्मीद है
भारत और रूस अब तक 22 वार्षिक शिखर बैठकों का आयोजन कर चुके हैं, और इस बार का शिखर सम्मेलन दोनों देशों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।









