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जनजाति गौरव दिवस एवं जनजाति समाज के गौरवशाली इतिहास पर बस्तर सांसद महेश कश्यप ने कालेज के छात्र एवं छात्राओं के साथ संवाद किया

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दंतेवाड़ा | शासकीय दंतेश्वरी स्नातकोत्तर महाविद्यालय दंतेवाड़ा में जनजाति गौरव माह अंतर्गत जनजाति समाज का गौरवशाली अतीत-ऐतिहासिक,सामाजिक एवं आध्यात्मिक योगदान विषय में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया | कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बस्तर सांसद महेश कश्यप,मुख्य वक्ता सेवानिवृत अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक,प्रांत संयोजक जनजाति सुरक्षा मंच छत्तीसगढ़ गोरखनाथ बघेल,विशिष्ठ अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष दंतेवाड़ा संतोष गुप्ता, जिला पंचायत अध्यक्ष दंतेवाड़ा नन्दलाल मुडामि,जिला पंचायत उपाध्यक्ष दंतेवाड़ा अरविन्द कुंजाम,जनभागीदारी अध्यक्ष शासकीय दंतेश्वरी स्नातकोत्तर महाविद्यालय दंतेवाड़ा राहुल असरानी,मंडल अध्यक्ष दंतेवाड़ा जय भंसाली,जिला पंचायत सदस्य तिलेस्वरी नागेश,सरपंच ग्राम पंचायत चितालंका मुन्नी भास्कर उपस्थित रहे | बस्तर सांसद महेश कश्यप का भाजपा पदाधिकारी,कार्यकर्ताओं,जनप्रतिनिधियों,छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया |

मुख्य वक्ता गोरख नाथ बघेल एवं अन्य अतिथियों का भी पुष्पगुच्छ भेंटकर स्वागत किया गया | कार्यक्रम की शुरुवात भारत माता,छत्तीसगढ़ महतारी,धरती आंबा भगवान बिरसा मुंडा जी के छायाचित्र पर पुष्प अर्पित एवं दिप प्रज्वलित कर किया गया | कार्यक्रम को संबोधत करते हुए बस्तर सांसद महेश कश्यप ने कहा की जनजाति गौरव दिवस केवल भगवान बिरसा मुंडा ही नहीं, आदिवासी समाज में जन्मे असंख्य महापुरुषों को समर्पित ह,ब्रिटिश हुकूमत द्वारा अपने जल, जंगल, ज़मीन, जनजाति पहचान एवं स्वतंत्रता पर संकट देखकर उसके रक्षण के लिए शोषणवादी अंग्रेजी सत्ता के विरोध में “उलगुलान” आंदोलन करने वाले धरती आबा की उपाधि से विभूषित भगवान बिरसा मुंडा की यह 150 वी जयंती का वर्ष है । उनका जन्म 15 नवम्बर 1875 को अलिहातू ग्राम जनपद राँची में हुआ था। अंग्रेजों के खिलाफ़ सशस्त्र विद्रोह करने के कारण वह गिरफ्तार हुए एवं जेल में ही 9 जून 1900 को उनका बलिदान हो गया । उनकी संघर्षमय स्मृति को चिरस्थायी रूप देने एवं उनसे युवा पीढ़ी प्रेरणा प्राप्त कर सके, इसके लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने 15 नवंबर को “जनजातीय गौरव दिवस” घोषित किया है | भगवान बिरसा मुंडा ने दुर्व्यसनों से रहित जीवन , अंधविश्वास से मुक्ति एवं अपनी भूमि के प्रति स्वाभिमान का भाव जनजाति समाज को सिखाया। उन्होंने शोषण के प्रति आवाज उठाते हुए बेगारी प्रथा का विरोध किया। ब्रिटिश सत्ता को लगान न देने का आह्वान कर उन्होंने उलगुलान आंदोलन कों प्रारंभ किया। उनका नारा था “अबुआ राज़ एते जाना, महारानी राज टुंडू जीना।”( हमारा शासन शुरू हो, रानी का शासन समाप्त हो ।)

श्री कश्यप ने कहा की नागालैंड की महारानी गाइडन्यू जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ़ विद्रोह किया एवं स्वधर्म के स्वाभिमान के लिए हरक्का आंदोलन चलाकर नागा समाज में मतांतरण का विरोध किया । राजस्थान में जन्मे गोविंद गुरु भील समाज में अध्यात्म, समाज सुधार एवं शोषण के खिलाफ़ आंदोलन के प्रतीक बन गये । रानी दुर्गावती, तिलका माजी, अल्लूरी सीताराम राजू, कोरम भील, टाट्या भील, सिद्धू – कानू मुर्मू आदि जनजाति समाज के महानायकों के बिना भारत का इतिहास अधूरा है । उत्तर से दक्षिण, पूर्व से पश्चिम तक फैले जनजातीय समाज ने स्वतंत्रता के आंदोलन, धर्म-संस्कृति एवं पर्यावरण के संरक्षण के लिए अपने प्राणों की बाजी लगाई है । संपूर्ण भारतवर्ष इन सभी महापुरुषों का सदैव ऋणी रहेगा । वर्तमान में भी मैरीकॉम मुक्केबाजी में, कोमालिका बारी धनुर्विद्या एवं दिलीप तिर्की हॉकी जैसे अनेक जनजातीय नौजवान अनेक विधाओं के माध्यम से देश का नाम उज्ज्वल कर रहे है।
मुख्य वक्ता गोरख नाथ बघेल ने भी भगवान बिरसा मुंडा,जनजाति समाज के क्रांतिकारियों के जीवनी एवं जनजाति समाज के गौरव् पर विस्तार से चर्चा किया | कार्यक्रम का संचालन प्राचार्य दिनेश कुमार लहरी ने किया | जनजाति समाज के शिक्षक,व्याख्याताओं एवं छात्र छात्राओं का अतिथियों द्वारा विशेष सम्मान किया गया | इस दौरान जनभागीदारी समिति सदस्य प्रियंका बेहरा,राजेश बोरबन,गौतम भाठी,डे नारायण,प्राचार्य डॉ के एम् प्रसाद,डॉ शिखा सरकार,डॉ रत्नबाला मोहंती,डॉ धारणा ठाकुर एवं अन्य शिक्षकगण व छात्र छात्राएं उपस्थित हुए |

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