नई दिल्ली-
अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) पर प्रवर्तन निदेशालय ने एक और बड़ा शिकंजा कसा है। एजेंसी ने लगभग 1,400 करोड़ रुपये मूल्य की जमीन और इमारतों को अटैच किया है। ये संपत्तियां नवी मुंबई, पुणे, चेन्नई और भुवनेश्वर समेत कई बड़े शहरों में फैली हुई हैं।
यह कदम उस व्यापक मनी-लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है, जिसे ED पिछले कई महीनों से आगे बढ़ा रही है। इससे पहले भी एजेंसी इस केस में 9,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां अटैच कर चुकी है।
हाईवे प्रोजेक्ट पर उठे सवाल
ED की जांच के मुताबिक, मामला जयपुर–रींगस हाईवे प्रोजेक्ट से जुड़ा है, जिसे 2010 में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर को मिला था।
एजेंसी का आरोप है कि इसी प्रोजेक्ट के जरिए सूरत की कुछ शेल कंपनियों के माध्यम से लगभग 40 करोड़ रुपये बाहर भेजे गए।
जांचकर्ताओं को शक है कि यह रकम एक बड़े हवाला नेटवर्क का हिस्सा हो सकती है, जिसका लेनदेन 600 करोड़ रुपये से ऊपर का हो सकता है।
ED इस केस में अब तक करीब 7,500 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अटैच कर चुकी है। इसी साल अगस्त में अनिल अंबानी से पूछताछ भी की गई थी।
CBI भी कर चुकी है FIR, 40,000 करोड़ के कर्ज पर नजर
यह मामला केवल ED तक सीमित नहीं है।
CBI ने भी अनिल अंबानी, RCOM और उससे संबद्ध कंपनियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। आरोप हैं कि 2010 से 2012 के बीच देश और विदेश के विभिन्न बैंकों से 40,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज लिया गया।
CBI के अनुसार, जिन खातों में यह पैसा भेजा गया, उनमें से कम से कम 5 खातों को बाद में बैंकिंग सिस्टम ने “फ्रॉड” घोषित किया। कई लेनदेन उन व्यक्तियों और कंपनियों तक पहुंचे, जिन पर पहले भी संदिग्ध लेनदेन के आरोप लग चुके हैं।
जांच जारी, और खुलासों की उम्मीद
ED का कहना है कि नई अटैच की गई संपत्तियों के फंड सोर्स, खरीद प्रक्रिया और लेनदेन की पूरी जांच की जा रही है।
एजेंसी को उम्मीद है कि दस्तावेजों की गहराई से पड़ताल के बाद इस केस में और भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।
ADAG ग्रुप पहले से ही वित्तीय संकट और कानूनी चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में ED और CBI की बढ़ती जांच उसके लिए मुश्किलें और बढ़ा सकती है।









