रायपुर संवाददाता – रघुराज
छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में एक दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया है। ढाई साल के मासूम बच्चे की मौत उसके सौतेले पिता की बेरहमी का शिकार बनकर हो गई। बताया जा रहा है कि आरोपी सौतेला पिता, आसिब खान, पिछले 15 दिनों से बच्चे को लगातार यातनाएं दे रहा था। उसकी दरिंदगी इस कदर बढ़ गई कि उसने मासूम को इतना मारा कि शरीर की करीब 30 हड्डियां टूट गईं। जब बच्चे ने दम तोड़ दिया, तब भी पिटाई जारी रही।
यह घटना तब सामने आई जब पड़ोसियों को बच्चे की लगातार आती दर्द भरी रोने की आवाजें सुनाई देती थीं। उन्होंने शक होने पर पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने जब घर का दरवाजा खोला तो अंदर का नजारा देखकर अधिकारियों के भी होश उड़ गए। मासूम बच्चे का निस्पंद शरीर जमीन पर पड़ा था और उसके शरीर पर चोटों के गहरे निशान दिखाई दे रहे थे।

पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी आसिब खान की शादी पीड़ित की मां से कुछ महीनों पहले हुई थी। महिला अपने पहले पति से अलग हो चुकी थी और आसिब के साथ रिश्ते में रहने लगी थी। पड़ोसियों के अनुसार, महिला इश्क में इतनी अंधी हो गई थी कि उसने कभी अपने बच्चे पर हो रहे अत्याचारों को महसूस नहीं किया। आसिब जब बच्चे को बेरहमी से मारता, तो मां चुपचाप देखती रहती या उसे नजरअंदाज कर देती थी।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि मासूम के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे, उसकी पसलियां, बाजू, पैर और सिर की कई हड्डियां टूटी हुई थीं। डॉक्टरों का कहना है कि इतने छोटे बच्चे के शरीर पर इस तरह की चोटें लंबे समय से हो रही थीं, यानी यह एक दिन की घटना नहीं थी। रिपोर्ट के मुताबिक बच्चे की मौत अत्यधिक रक्तस्राव और आंतरिक चोटों के कारण हुई।
पुलिस ने आरोपी आसिब खान को गिरफ्तार कर लिया है और उस पर हत्या तथा बाल अत्याचार के गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। वहीं, मां को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह इस मामले में कितनी शामिल थी या उसने इस यातना को रोकने का कोई प्रयास क्यों नहीं किया।
स्थानीय लोगों ने इस घटना पर गहरा रोष व्यक्त किया है। उन्होंने मांग की है कि आरोपी को कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाए ताकि भविष्य में कोई और मासूम इस तरह की दरिंदगी का शिकार न बन सके। यह घटना न केवल एक परिवार बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है कि रिश्तों में मोह और अंधेपन के कारण छोटे बच्चों की सुरक्षा से समझौता न किया जाए।









