श्रम सुधारों की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने संसद से पांच साल पहले पारित चारों लेबर कोड (श्रम संहिता) को लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी।
इसमें गिग वर्कस समेत श्रमिकों के हितों के लिहाज से यूनिवर्सल सामाजिक तथा स्वास्थ्य सुरक्षा देने, सभी कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से नियुक्ति पत्र देने, सीमित अवधि के लिए कांट्रैक्ट कर्मचारियों को भी स्थाई कर्मचारियों जैसी सुविधा देने जैसे अहम प्रावधान किए गए हैं।
इतना ही नहीं अब ग्रेच्यूटी के लिए पांच साल तक की नौकरी की न्यूनतम अनिवार्यता नहीं रहेगी बल्कि एक साल की नौकरी के बाद ही कर्मचारी ग्रेच्यूटी लाभ पाने का हकदार हो जाएगा। ओवर टाइम का भुगतान के नियम समेत श्रमिक तथा कंपनियों दोनों के हित में कई बदलाव हैं लेबर कोड का हिस्सा।
इसके तहत सभी क्षेत्रों के कामगारों के लिए समय पर न्यूनतम वेतन के साथ ही ओवर टाइम काम के घंटों के लिए दोगुना भुगतान करना होगा।
इन सुधारों में महिलाओं की सुरक्षा समेत नाइट-शिफ्ट में काम की छूट, 40 वर्ष से अधिक उम्र के हर कामगार की सालाना मुफ्त अनिवार्य चिकित्सा जांच के साथ ही अब एक सिंगल रजिस्ट्रेशन, लाइसेंस और रिटर्न सिस्टम का प्रावधान किया गया है।
लेबर कोड लागू करने में तमाम श्रम संगठनों तथा कई राज्यों के विरोध के कारण लंबे समय से आ रही अड़चन के बीच माना जा रहा है कि अमेरिका से जारी टैरिफ वार की आर्थिक चुनौतियों के परिप्रेक्ष्य में सरकार ने श्रम सुधारों पर साहसिक कदम बढ़ाने का फैसला लिया है।









