जांजगीर-चांपा संवाददाता – राजेन्द्र जायसवाल
जिला जांजगीर–चांपा / जिला शक्ति निवासी ने बिर्रा थाना में पदस्थ एक पुलिसकर्मी पर रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। बाराद्वार निवासी हरभाई लहरे और उनकी बेटी सुखबाई (आरती) ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया है कि रिपोर्ट दर्ज करने और चालान न्यायालय में प्रस्तुत करने के बदले उनसे कुल ₹ 7000 की अवैध वसूली की गई।
पीड़िता का कहना है कि बहु–ससुराल विवाद के चलते जब वे थाना पहुँचीं, तब मामले की निष्पक्ष रिपोर्ट दर्ज करने के बजाय उनसे कोरे कागज पर हस्ताक्षर कराए गए और तत्काल ₹7,000 लिया गया ओर 5000 की मांग की गई।
पीड़िता हरभाई के अनुसार—
“मेरी शिकायत नहीं ली गई, पुलिसकर्मी ने खुद कागज में लिखकर हस्ताक्षर कराए और चालान तैयारी के 7,000 रुपये लिया गया उसके बाद चालान को चाम्पा कोर्ट ले जाने के लिये ओर 5000 हजार रूपये मांगे नहीं दोगो तो आपकी चालन पेश नहीं करूंगा बोला अनिल कुमार आजगल्ले मांग कर रहा जिसकी वीडियो वाइस रिकार्ड ओर तो सिविल ड्रेस चाम्पा कोर्ट आया था
19 नवंबर को दोबारा मांग — “चालान कोर्ट में पेश नहीं होने दूँगा”
शिकायत के मुताबिक, 19 नवंबर 2025 को संबंधित पुलिसकर्मी ने पीड़िता की बेटी के मोबाइल पर फोन कर अतिरिक्त ₹5,000 की मांग की। आरोप है कि धमकी दी गई कि—
“अगर पैसे नहीं दोगे तो चालान कोर्ट में पेश नहीं होने दूँगा।”
यह आरोप भी लगाया गया कि फोन रिकॉर्ड करने पर देख लेने की चेतावनी दी गई।
पीड़िता सुखबाई आरती का कहना है कि वे अपनी आंखों के सामने ₹7,000 नकद पुलिसकर्मी को देते हुए देख चुकी हैं, और कोर्ट में पेशी से पहले अतिरिक्त ₹5,000 माँगे गए।
गरीबी ने बढ़ाई पीड़ा — “रोज़ी–रोटी चलाना मुश्किल, इतनी रिश्वत कैसे दें?”
हरभाई लहरे एक गरीब परिवार से आती हैं। उनका कहना है कि—
हम मजदूरी करके घर चलाते हैं, इतने पैसे कहाँ से दें? दबाव और धमकियों की वजह से एसपी कार्यालय में शिकायत करनी पड़ी।”

पैसा नहीं देने पर न्यायिक प्रक्रिया में बाधा पहुँचाने का भय, स्कूटनी में चालान लौटाने की घटना और लगातार आर्थिक दबाव ने परिवार की पीड़ा को और बढ़ा दिया।
प्रशासन की ओर से प्रतिक्रिया—‘जांच कर कार्यवाही की जाएगी’
चाम्पा अनुविभागीय अधिकारी पुलिस यदुमणि सिदार ने इस मामले में कहा है कि:
“चालान को पैसे के लिए रोका गया—ऐसी शिकायत मिली है। पूरी जानकारी लेकर उचित कार्यवाही की जाएगी।”
यह बयान बताता है कि प्रशासन ने शिकायत को संज्ञान में ले लिया है और अब जांच की प्रक्रिया पर सबकी नज़रे टिकी हैं।
क्या खाकी पर एक और दाग?—जनता में उठ रहे सवाल
इस मामले के सामने आते ही क्षेत्र में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। लोग सवाल कर रहे हैं—
क्या गरीब परिवार को न्याय पाने के लिए रिश्वत देना जरूरी है?
क्या थानों में अवैध वसूली की यह प्रवृत्ति रुक पाएगी?
क्या जांच के बाद दोषियों पर कठोर कार्रवाई होगी या मामला फाइलों में दब जाएगा?
ऐसे मामले न केवल आम जनता का पुलिस पर विश्वास कमजोर करते हैं, बल्कि ईमानदार पुलिसकर्मियों की छवि पर भी दाग लगाते हैं।
पूर्व निलंबन का उल्लेख भी उठ रहा सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस पुलिसकर्मी पर आरोप लगे हैं, उस पर पहले भी निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है। हालांकि इसका आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आना अभी बाकी है, लेकिन यह चर्चा मामले को और संवेदनशील बना रही है।
क्या होगी आगे की कार्रवाई?
अब जिम्मेदारी पुलिस विभाग और वरिष्ठ अधिकारियों पर है कि वे—
आरोपों की निष्पक्ष जांच कराएं
रिश्वत के प्रमाणों की पुष्टि करें
दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करें
पीड़ित परिवार को न्याय दिलवाने में मदद करें
यह मामला सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि सिस्टम की विश्वसनीयता की परीक्षा बन गया है।
बिर्रा थाना रिश्वत प्रकरण ने एक बार फिर यह दर्दनाक सच्चाई उजागर कर दी है कि जब न्याय की दहलीज पर ही भ्रष्टाचार खड़ा
बिर्रा थाना रिश्वत प्रकरण ने एक बार फिर यह दर्दनाक सच्चाई उजागर कर दी है कि जब न्याय की दहलीज पर ही भ्रष्टाचार खड़ा हो जाए, तो आम इंसान कहाँ जाए?
अब पूरा क्षेत्र इस बात पर नजरें टिकाए है कि क्या इस शिकायत पर प्रशासन सचमुच सख्त कदम उठाएगा या फिर यह मामला भी कई अन्य मामलों की तरह समय के साथ धूल चाटता रह जाएगा।









