= आर्सेलर मित्तल आंध्र के अनकापल्ली में लगा रहा देश का सबसे बड़ा स्टील प्लांट =
= 1.4 लाख करोड़ की लागत से बन रहा प्लांट, 55 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार =
= शबरी के पानी के रास्ते बस्तर से जाएगा अयस्क = = सब कुछ बस्तर का लेकिन बस्तरिहा के लिए कुछ भी नहीं =
*-अर्जुन झा-*
*जगदलपुर।* छतीसगढ़ सरकार देश के महानगरों में इन्वेस्टर मीट्स का भव्य आयोजन कर अपने प्रदेश की आकर्षक औद्योगिक नीति के सहारे देश के बड़े औद्योगिक घरानों को छतीसगढ़ में उद्योग लगाने हेतु प्रेरित कर रही है। वहीं दूसरी ओर बस्तर के नदी नालों के पानी के सहारे अब तक करोड़ों टन लौह अयस्क ले जा चुकी एएमएनएस जैसी दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी स्टील कंपनी आंध्रपदेश के अनकापल्ली में 1.4 लाख करोड़ रुपये की लागत से देश का सबसे बड़ा स्टील प्लांट लगाने जा रही है।
आर्सेलर मित्तल निप्पोन स्टील (पहले एस्सार) द्वारा किरन्दूल स्थित एनएमडीसी की खदानों से रोज़ाना औसतन 20 हज़ार टन लौह अयस्क चूर्ण स्लरी पाइप लाइन के जरिए अपने विशाखापत्तनम स्थित प्लांट ले जाया जा रहा है। बस्तर की शबरी नदी और दंतेवाड़ा के मदाड़ी नाले के हज़ारों क्यूसेक पानी का उपयोग रोज़ाना इस परिवहन में किया जा रहा है। 2005 से यह सिलसिला अनवरत जारी है। इस कंपनी के किरंदुल स्थित बेनिफिकेशन प्लांट से बस्तरवासियों को अब तक कोई लाभ तो नहीं मिल सका, लेकिन इस प्लांट से निकलने वाले लौह अयस्क के अपशिष्ट से दंतेवाड़ा जिले की सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि बंजर जरूर हो चुकी और नदी नाले प्रदूषित हो चुके हैं। नदी नालों के शुद्ध पेयजल का जो दुरूपयोग इस प्रक्रिया के तहत बीस सालों पहले शुरू हुआ था वो आज भी बिना किसी रोक टोक जारी है । बस्तर के लोगों को रोजगार और पर्यावरण का जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई अब इस तरह से करने की तैयारी है कि अब यहां के पानी के सहारे ले जाया जाने वाला यहां का बेशकीमती लौह अयस्क आंध्रप्रदेश के अनकापल्ली में गलाया जाने वाला है और एकबार फिर बस्तर के बेरोज़गार युवाओं को छला जाने वाला है। आंध्रप्रदेश के अनकापल्ली में इस कंपनी द्वारा जो स्टील प्लांट लगाया जा रहा है उसकी वार्षिक क्षमता 24 मिलियन टन है।इतनी बड़ी मात्र में स्टील बनाने के लिए करीब 36 लाख टन लौह अयस्क की अपूर्ति बैलाडीला की खदानों से की जानी है। अनुमान है कि इस संयत्र से जनवरी 2029 में प्रथम चरण का निर्धारित उत्पादन शुरू हो जाएगा। आंध्र प्रदेश सरकार का कहना है कि इस प्लांट से वहां कि तस्वीर बदल जाएगी, रोज़गार के अभूतपूर्व अवसर उपलब्ध होंगे। पहले फेज़ में 20 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा और दूसरे फेज़ में अतिरिक्त 35 हज़ार लोगों को रोज़गार मिलेगा। अर्थात इस प्लांट से कुल 55 हज़ार लोगों को रोज़गार मिलेगा।इधर बस्तर के जिन गरीब आदिवासियों के जल जंगल और ज़मीन के सहारे मोटा मुनाफा कमाने की आंध्रप्रदेश में तैयारी की जा रही है उन आदिवासियों के साथ हो रहे इतने बड़े धोखे पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
*जमीन हुई बर्बाद, शबरी का अस्तित्व खतरे में*
किरंदुल से विशाखापत्तनम तक सड़क मार्ग से लौह अयस्क के परिवहन का खर्च 2000 से 2200 रुपये प्रति टन होता है, वहीं स्लरी पाईप लाईन से पानी के माध्यम से परिवहन का खर्च 200 रुपये प्रति टन के आसपास होता है। इस हिसाब से रोज़ाना 20 हज़ार टन लौह अयस्क के परिवहन में कंपनी को लगभग चार करोड़ रुपये की शुद्ध बचत हो रही है। अब अनकापल्ली प्लांट की अपूर्ति भी इसी माध्यम से की जाने वाली है। इसके लिए पाईप लाईन की क्षमता भी बढ़ाने की तैयारी है। नगरनार स्टील प्लांट पूरी तरह शबरी नदी के पानी पर आश्रित है। वर्तमान में आर्सेलर मित्तल निप्पोन स्टील कंपनी लगातार इस नदी का दोहन कर ही रही है। ऐसे में इस कंपनी के लिए 36 लाख टन लौह अयस्क की अपूर्ति अनकापाल्ली प्लांट के लिए अगर इसी माध्यम से की गई तो शबरी नदी क्या हाल होगा इसे जानने और समझने की फुर्सत किसी के पास नहीं है।
*सेनेटरी पैड बांट कर जता रहे अहसान*
विश्व की दूसरी सबसे बड़ी स्टील निर्माता कंपनी जो अब तक यहां के पानी और लोहे से अरबों रुपयों का मुनाफा कमा चुकी है, उसके पास बस्तरवासियों को देने के लिए कुछ भी नहीं है। कई बेरोज़गार नौजवानों ने परिवहन का काम मिलने की आस में ट्रकें खरीदीं, लेकिन शबरी के सस्ते पानी के आगे उनके डीजल और मेहनत की कीमत इस कंपनी की नज़रों में बहुत ज़्यादा है। इस कंपनी द्वारा आसपास के प्रभावित 20 गांवों को भी गोद लेने का दावा झूठा साबित हुआ है । कभी कभी दस बीस रुपये के कॉपी पेंसिल बच्चों में बांट कर, कभी इतनी ही कीमत के सेनेटरी पैड आदिवासी बच्चियों से बनवाने और बांटने का अहसान कर रही इस कंपनी का प्लांट आंध्रप्रदेश में लग रहा है। जहां यह कंपनी 55 हजार लोगों को रोजगार देने जा रही है। इसे बस्तारवासियों के साथ धोखा नहीं तो और क्या कहेंगे?
*छग सरकार से नहीं मांगी जमीन*
एएमएनएस के प्रतिनिधि प्रतीक सिंह से जब पूछा गया कि यह प्लांट बस्तर संभाग या फिर छत्तीसगढ़ में लगाए जाने हेतु प्रदेश सरकार से कभी कोई चर्चा हुई, तो उन्होंने कहा कि अनकापल्ली से विशाखापत्तनम पोर्ट नजदीक है इसलिए यहां प्लांट लगाया जाना लाभप्रद नहीं है। इसलिए छत्तीसगढ़ सरकार के समक्ष कोई प्रस्ताव नहीं रखा गया और आंध्रप्रदेश में यह प्लांट लगाया जा रहा है।अनकापल्ली प्लांट में कच्चे माल की आपूर्ती के लिए नयी स्लरी पाईप लाईन तैयार करने के सवाल पर उन्होंने पर कहा की इसी पुरानी पाइपलाइन को अपग्रेड किया जाएगा।
*शबरी का पानी बर्बाद नहीं होने देंगे: शुक्ल*
बस्तर के वरिष्ठ कांग्रेस नेता उमाशंकर शुक्ल ने कहा है कि यह सीधे सीधे बस्तर वासियों के साथ धोखा है। यहां प्लांट लगता तो हजारों स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता। सारे संसाधन हमारे हैं और लाभ अन्य प्रदेश के लोगों को मिलेगा। बस्तर वैसे ही जल संकट से गुजर रहा है। एक शबरी नदी ही बची है उस पर भी उद्योगपतियों की नजर है। बस्तर के बेरोजगार युवकों को अपने हक के लिए लड़ना चाहिए। शबरी का पानी किसी भी सूरत में अनकापल्ली नहीं ले जाने दिया जाएगा। इसके लिए व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा।









