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तिरुपति बालाजी के धाम में सेवा के लिए पहुंचे रायपुर के श्रद्धालु

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रघुराज/रायपुर –

रायपुर से तिरुपति बालाजी के पवित्र धाम पहुंचे एक बड़े सेवा दल ने 27 नवम्बर को पूरे दिन मंदिर परिसर में सेवा कार्य करते हुए छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया। यह दल स्थानीय एनजीओ से जुड़ी टीम का था, जो विशेष रूप से भगवान श्री वेंकटेश्वर के दर्शन और सेवा के उद्देश्य से तिरुमला गया था। श्री बालाजी के दर्शन के बाद पूरे उत्साह और भक्ति-भाव के साथ टीम ने सुबह से देर शाम तक विभिन्न सेवा गतिविधियों में अपना योगदान दिया। तिरुपति बालाजी मंदिर देश के सबसे प्रसिद्ध और आस्था से जुड़े प्रमुख वैष्णव तीर्थों में से एक माना जाता है, जहाँ हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

इस सेवा दल में प्रमुख रूप से एस. गणेश जी, चेतन देवांगन, जी. आनंद, ए. श्रीनिवास राव, टी. बाबू राव, बी. सूर्यनारायण, के. गणेश, राकेश देवांगन, रविन्द्र देवांगन, एस. जगदीश, प्रकाश देवांगन और हुपल देवांगन सहित रायपुर और आसपास के क्षेत्रों से जुड़े कार्यकर्ता शामिल थे। इनके साथ ही 50 से अधिक श्रद्घालु यात्री भी इस तीर्थ यात्रा और सेवा अभियान में सहभागी बने। पूरी टीम ने सामूहिक रूप से दर्शन कर भगवान से प्रदेश और देश की खुशहाली, समाज में सद्भाव और सेवा भाव की निरंतरता की प्रार्थना की। तिरुपति बालाजी मंदिर में श्रद्घालु प्रायः दर्शन के साथ-साथ सेवा को भी आध्यात्मिक साधना का ही एक महत्वपूर्ण रूप मानते हैं।

27 नवम्बर की सुबह मंगला आरती के बाद से ही टीम के सदस्य मंदिर के भीतर विभिन्न व्यवस्थाओं में सहयोग के लिए सक्रिय हो गए। पूरे दिन श्रद्घालुओं की कतारों में अनुशासन बनाए रखने, वृद्ध और दिव्यांग भक्तों की सहायता करने, प्रसाद वितरण व्यवस्था में सहयोग देने और स्वच्छता संबंधी कार्यों में योगदान जैसी सेवाएँ की गईं। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम् प्रशासन द्वारा समय–समय पर स्वैच्छिक सेवा के लिए आने वाले समूहों को जिम्मेदारियाँ सौंपी जाती हैं, जिससे बड़ी संख्या में आने वाले भक्तों को व्यवस्थित दर्शन और सुविधाएँ मिल सकें।

रायपुर से पहुंचे इस दल ने न केवल सेवा कार्य किये, बल्कि तिरुपति बालाजी में लागू अनुशासन, दर्शन व्यवस्था और सेवा संस्कृति से भी बहुत कुछ सीखने की बात कही। यहाँ की सुव्यवस्थित दर्शन पंक्तियाँ, आवास और प्रसाद व्यवस्था देश भर के मंदिरों के लिए एक आदर्श मॉडल मानी जाती हैं। टीम के सदस्यों ने बताया कि वे इस अनुभव के आधार पर अपने शहर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों और यात्राओं में भी बेहतर प्रबंधन और सेवा भाव को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे। तिरुपति बालाजी मंदिर में प्रतिदिन हजारों से लेकर लाखों तक श्रद्घालु दर्शन के लिए आते हैं, जिनके सुचारु संचालन के लिये स्वयंसेवी सेवा दलों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

एनजीओ से जुड़े इन कार्यकर्ताओं ने इसे केवल धार्मिक यात्रा न मानकर समाज सेवा की एक सशक्त साधना के रूप में लिया। टीम के वरिष्ठ सदस्यों ने कहा कि भगवान के चरणों में सेवा करने से आत्मिक संतोष मिलता है और यही भावना उन्हें आगे भी ऐसे सेवा कार्यों के लिए प्रेरित करती रहेगी। रायपुर लौटने पर यह दल अपने अनुभवों को समाज के बीच साझा करेगा, ताकि अधिक से अधिक युवा और श्रद्धालु भविष्य में भी इस तरह की सेवाओं और तीर्थ यात्राओं से जुड़ सकें। तिरुपति बालाजी जैसे बड़े तीर्थों में सेवा करने की परंपरा दक्षिण भारत सहित पूरे देश में भक्ति, अनुशासन और समर्पण की जीवंत मिसाल मानी जाती है।

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