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सेवा से निष्कासित अतिथि शिक्षकों का प्रदर्शन, कहा– “नक्सल प्रभावित इलाकों में जोखिम उठाया, अब बाहर कर दिया गया”

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दंतेवाड़ा संवाददाता – रिकेश्वर राणा

दंतेवाड़ा।
सेवा से निष्कासित किए गए अतिथि शिक्षकों ने शुक्रवार को ज़िला कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर दो घंटे तक धरना-प्रदर्शन कर प्रशासन के खिलाफ़ जोरदार विरोध जताया। शिक्षकों का कहना है कि वे वर्ष 2014 से दक्षिण बस्तर के सबसे संवेदनशील और अंदरूनी नक्सल प्रभावित इलाकों में लगातार सेवाएं दे रहे थे। लेकिन जैसे ही क्षेत्र में नक्सलवाद की स्थिति सामान्य होने लगी, प्रशासन ने उन्हें सेवा से बाहर कर बेरोजगार कर दिया।
प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने बताया कि दंतेवाड़ा जिले में कुल 272 अतिथि शिक्षक कार्यरत थे, जिनमें से 105 को दोबारा बुला लिया गया है, जबकि 166 शिक्षकों को अब तक नियुक्ति नहीं दी गई है। इनमें अधिकांश वे शिक्षक शामिल हैं जिन्होंने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जोखिम उठाकर काम किया और उन इलाकों में शिक्षा व्यवस्था को ज़मीन पर बनाए रखा, जहाँ न अधिकारी जाते थे और न ही जनप्रतिनिधि।
अतिथि शिक्षकों ने कहा कि उन्होंने बच्चों को स्कूल से जोड़ने और शाला-त्यागी बच्चों को वापस स्कूल भेजने के लिए लगातार मेहनत की। कई बार उन्हें जान जोखिम में डालकर दूरस्थ गांवों तक जाना पड़ा, लेकिन आज उन्हीं शिक्षकों को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।
शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया कि उनका वेतन शासन की राशि से नहीं, बल्कि ज़िला खनिज न्यास (DMF) फंड से दिया जाता था—जो जिले के विकास के लिए निर्धारित है। इसके बावजूद अधिकारियों द्वारा फंड की कमी का हवाला देकर उन्हें सेवा से बाहर कर दिया गया।
प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि निष्कासित सभी शिक्षकों को तत्काल सेवा में बहाल नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा और अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।

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