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अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा दो साल से अनावरण की प्रतीक्षा में, सवालों के घेरे में BJP सरकार

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रायपुर संवाददाता – रघुराज
पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का रायपुर में अब तक अनावरण न होना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। भाजपा सरकार बने लगभग एक वर्ष बीत चुका है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो बार छत्तीसगढ़ का दौरा कर चुके हैं, फिर भी वाजपेयी जी की प्रतिमा जनता के लिए देखने योग्य नहीं हो पाई।
खालसा स्कूल के सामने बने चौक में राजकीय पशु ‘भैंसे’ की प्रतिमा भी दो साल से अनावरण की प्रतीक्षा में ढकी हुई खड़ी है। हर दो-तीन महीने में बस कवर बदल दिया जाता है, लेकिन मूर्ति के आसपास विकास कार्य या संवेदनशील सौंदर्यीकरण की दिशा में कोई ठोस पहल नजर नहीं आती। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकार केवल दिखावटी कामों में व्यस्त है, जबकि वास्तविक विकास कार्य ठप पड़े हैं।
विकास के मुद्दों पर विपक्ष ने भी सरकार को घेरा है। कांग्रेस नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा सरकार जनभावनाओं का सम्मान नहीं कर रही। “अटल जी भारतीय राजनीति के ऐसे व्यक्तित्व थे, जिनका आदर सभी दल करते हैं। उनका नाम लेकर वोट तो मांगे गए, लेकिन उनके सम्मान में बनी प्रतिमा आज भी पर्दे के नीचे छिपी हुई है,” बघेल ने तंज कसते हुए कहा।
दूसरी ओर, भाजपा नेताओं का कहना है कि प्रतिमा के आस-पास सौंदर्यीकरण कार्य और कुछ तकनीकी प्रक्रियाओं के कारण कार्यक्रम में देरी हुई है। हालांकि नागरिकों का धैर्य अब टूटने लगा है। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर #BJPgovernment, #NarendraModiCMOChhattisgarh जैसे हैशटैग के साथ आलोचनात्मक पोस्ट साझा किए हैं।
अटल एक्सप्रेस-वे पर लगी वाजपेयी जी की एक अन्य प्रतिमा भी महीनों से अनावरण की प्रतीक्षा में है। स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि जब प्रधानमंत्री खुद राज्य में दो बार आ चुके हैं, तब भी प्रतिमा के अनावरण का अवसर क्यों नहीं मिल पाया। कई नागरिक संगठनों और युवाओं ने भी इसे प्रशासनिक उदासीनता बताया है।
सरकार की व्यस्तता को लेकर विपक्षी दलों का आरोप है कि भाजपा अपने राजनैतिक प्रचार कार्यक्रमों में तो सक्रिय है, लेकिन स्थानीय विकास और सांस्कृतिक प्रतीकों के सम्मान में गंभीरता नहीं दिखा रही। वहीं भाजपा समर्थक दावा करते हैं कि वाजपेयी जी की प्रतिमा के अनावरण का कार्यक्रम जल्द ही प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री द्वारा किया जाएगा, और यह आयोजन “भव्य एवं ऐतिहासिक” रूप में होगा।
जनता अब इंतजार में है कि अटल जी की प्रतिमा कब परदे से बाहर आएगी और रायपुर की जनता उन्हें श्रद्धांजलि दे सकेगी। सवाल यह है कि क्या यह सम्मान का मामला प्रशासनिक उलझनों में उलझा है या राजनीतिक प्राथमिकताओं की सूची में नीचे खिसक गया है। जबकि अटल बिहारी वाजपेयी जैसे नेता का स्मारक केवल मूर्ति नहीं, बल्कि देश की राजनीतिक संस्कृति और आदर्शों का प्रतीक माना जाता है।

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