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सरकारी बेतालों पर विक्रम का बड़ा हमला

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बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा

संकनपल्ली के 11 आदिवासियों की पैतृक जमीन गैर आदिवासी नाम, कैसे हुई रजिस्ट्री
बीजापुर में आदिवासीयों के जमीनों को बड़े पैमाने पर हड़पने का गंभीर आरोप 
जगदलपुर। बस्तर संभाग के बीजापुर में जिले में संविधान की पांचवीं अनुसूची, पेसा कानून और पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम लागू होने के बावजूद आदिवासियों की बेशकीमती पैतृक जमीनों को सुनियोजित ढंग से हड़पा जा रहा है। इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब बुधवार को जिला मुख्यालय में विधायक विक्रम मंडावी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य सरकार पर खुलेआम आदिवासियों की जमीन लुटने देने का सनसनीखेज आरोप लगाया।
विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि बीजापुर जिला अनुसूचित क्षेत्र है। यहां आदिवासी अपनी मिट्टी को मां कहकर पूजते हैं, लेकिन आज छल, कपट और कूटरचित दस्तावेजों के जरिए उनकी सदियों पुरानी पैतृक जमीनें गैर आदिवासियों के नाम की जा रही हैं। यह सिर्फ जमीन का मामला नहीं, आदिवासी अस्मिता, संस्कृति और अस्तित्व पर सीधा हमला है।
विधायक विक्रम मंडावी ने प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि उसूर तहसील के ग्राम संकनपल्ली में आदिवासी परिवारों की लगभग 41 हेक्टेयर से अधिक बहुमूल्य कृषि भूमि को पहले एक गैर आदिवासी रामसिंग पिता बुधराम यादव (जाति रावत) ने अपने नाम कर लिया। फिर उसे जगदलपुर निवासी कमलदेव झा व अन्य को को बेच दिया। विधायक ने कहा संकनपल्ली के ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि जिन खसरा नंबरों की जमीन इस सौदे में शामिल की गई, वे मूल रूप से आदिवासी परिवारों के नाम पर दर्ज हैं जो इस प्रकार हैं- खसरा नं. 314, रकबा 5.634 हेक्टेयर भूमि स्वामी बतक्का यालम, खसरा 400, रकबा 5.831 हेक्टेयर भूमि स्वामी यालम लक्ष्मीनारायण, कामेश यालम, खसरा 435, रकबा 6.144 हेक्टेयर भूमि स्वामी यालम लक्ष्मीनारायण, खसरा 437, रकबा 5.843 हेक्टेयर भूमि स्वामी धरमैया यालम, पवन, राजैया व गौरैया, खसरा नंबर 613 रकबा 4.897 हेक्टेयर भूमि स्वामी बसवैया जव्वा, खसरा नंबर 648/3 रकबा 2.023 हेक्टेयर भूमि स्वामी शांता जव्वा व मोहन जव्वा, खसरा नं. 650/2 रकबा 0.809 हेक्टेयर भूमि स्वामी दशरथ जव्वा व कामेश जव्वा, खसरा नंबर 651/3 रकबा 1.214 हेक्टेयर भूमि स्वामी नागैया यालम, खसरा नंबर 631 रकबा 4.076 हेक्टेयर भूमि स्वामी बिचमैया टिंगे, चलमैया व शिवैया, खसरा नंबर 658/2 रकबा 5.031 हेक्टेयर भूमि स्वामी हनुमंत यालम, शंकर, सम्मैया आदि। ये सभी भूमि मालिक आदिवासी हैं और यह जमीनें पीढ़ी-दर-पीढ़ी से उनके पास हैं। विधायक विक्रम मंडावी ने प्रेस वार्ता में आगे कहा कि भूमाफियाओं द्वारा संकनपल्ली के जमीनों को सबसे पहले रामसिंग यादव के नाम दर्ज कराई गईं। जो संकनपल्ली गांव का रहने वाला है। फिर रामसिंग ने अपने नाम की जमीन को जगदलपुर के कमलदेव झा व अन्य दो को बेच दिया। इसके बाद तहसीलदार उसूर ने बिना किसी जांच-पड़ताल के जमीन के दस्तावेज तैयार करवा दिए। अब क्रेता कमलदेव झा व अन्य दो पटवारी पर दबाव डाल रहे हैं कि उनकी जमीन को कंप्यूटर में ऑनलाइन कर दिया जाए। विक्रम मंडावी आगे कहा कि सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरे घटनाक्रम की भनक गांव के किसी भी व्यक्ति को नहीं लगी। न ग्रामसभा को सूचना, न पंचायत को खबर मिली। पूरी प्रक्रिया को गुपचुप तरीक़े से अंजाम दिया गया।

विक्रम के बेतालों से सवाल
विधायक विक्रम मंडावी ने शासन के बेतालों यानि अधिकारियों से सवाल पूछते हुए कहा- कि कमलदेव आखिर है कौन है? वह गैर-आदिवासी है, फिर पांचवीं अनुसूची वाले क्षेत्र में इतनी बड़ी आदिवासी जमीन उसके नाम कैसे हो गई? एक साथ दर्जनों खसरा नंबरों की इतनी बड़ी जमीन एक व्यक्ति ने कैसे खरीद ली और एक ही झटके में बेच कैसे दी? तहसीलदार, पटवारी और उप-पंजीयक ने बिना किसी वैध अनुमति और ग्रामसभा की सहमति के नामांतरण और रजिस्ट्री कैसे कर दी‌? क्रेता अब पटवारी पर जमीन दस्तावेजों को कंप्यूटर में ऑनलाइन दर्ज करने दबाव क्यों डाल रहे हैं? क्या आगे और बड़ी साजिश रची जा रही है?

रद्द हो रजिस्ट्री, दर्ज हो एफआईआर
विधायक विक्रम मंडावी ने सरकार से मांग है कि इस पूरे मामले की उच्च-स्तरीय न्यायिक जांच हो। दोषी अधिकारी एवं गैर आदिवासी भूमाफिया पर तत्काल एफआईआर दर्ज हो। सभी अवैध रजिस्ट्रियां एवं नामांतरण रद्द किए जाएं। आदिवासियों की पैतृक जमीन उन्हें तत्काल वापस दिलाई जाए। भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए सख्त कानून बनाया जाए। प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि यदि उनकी जमीन नहीं लौटाई गई तो वे बड़ा आं…

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