रायपुर-
अग्रवाल और सिंधी समाज के ईष्ट देवताओं पर भड़काऊ टिप्पणी करने के मामले में फरार चल रहे जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के मुखिया अमित बघेल ने आखिरकार देवेन्द्र नगर थाने में आत्मसमर्पण कर दिया। सरेंडर के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई थी, वहीं जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ भी मौके पर मौजूद रही।
दो थानों में दर्ज थे मामले, घोषित किया गया था भगोड़ा
अग्रसेन महाराज और झूलेलाल जी को लेकर दिए गए आपत्तिजनक बयान के बाद बघेल के खिलाफ देवेन्द्र नगर और कोतवाली दोनों थानों में एफआईआर दर्ज की गई थी। लंबे समय तक गिरफ्तारी नहीं होने पर रायपुर पुलिस ने बघेल को भगोड़ा घोषित कर 5 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया था।
सरेंडर के दौरान उनके वकील भी साथ रहे।
पुलिस पर माहौल बिगाड़ने का आरोप
घटना स्थल पर मौजूद छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के जिला महामंत्री मनोज साहू ने आरोप लगाया कि बघेल ने खुद सरेंडर की पेशकश की थी, इसके बावजूद पुलिस ने अनावश्यक तनाव पैदा किया और धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बन गई।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि “राज शेखावत जैसे मामलों में कार्रवाई क्यों नहीं होती, जबकि अमित बघेल को निशाना बनाया जा रहा है।”
जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रवक्ता दीपक साहू ने कहा कि वे चाहते हैं कि बघेल को जल्द राहत मिले, ताकि वे अपनी मां की अंतिम रस्में पूरा कर सकें।
क्या है पूरा विवाद?
यह मामला 26 अक्टूबर 2025 को रायपुर के VIP चौक से जुड़ा है, जहां छत्तीसगढ़ महतारी की मूर्ति के साथ तोड़फोड़ की गई थी। अगले दिन मौके पर पहुंचे अमित बघेल और उनके समर्थकों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया, जिसके दौरान पुलिस और समर्थकों के बीच झड़प भी हुई।
पुलिस ने बाद में आरोपी को राम मंदिर क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। आरोपी मानसिक रूप से अस्वस्थ था और नशे की हालत में उसने मूर्ति को नुकसान पहुंचाया था।
समाजों में उभरा आक्रोश
घटना के बाद अमित बघेल द्वारा अग्रवाल समाज के ईष्ट देव अग्रसेन महाराज और सिंधी समाज के आराध्य झूलेलाल जी पर की गई टिप्पणियों ने दोनों समुदायों में तीखा विरोध पैदा कर दिया।
रायपुर, रायगढ़, सरगुजा सहित कई जिलों में समाज के लोगों ने विरोध जताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की थी।
सिंधी समाज के पदाधिकारियों की शिकायत पर कोतवाली थाने में बघेल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।









