6 दिसंबर भारत के इतिहास में एक विशेष दिन के रूप में मनाया जाता है, क्योंकि यह दिन संविधान निर्माता, सामाजिक न्याय के योद्धा और महान विधिवेत्ता डॉ. बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि है। इस दिन को महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में पूरे देश में बड़े सम्मान और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
डॉ. अंबेडकर न केवल भारत के पहले कानून मंत्री थे, बल्कि उन्होंने उस संविधान की रचना की, जो आज भी दुनिया के सबसे विस्तृत और समावेशी संविधानों में से एक माना जाता है। उनका जीवन सामाजिक भेदभाव के खिलाफ संघर्ष और कमजोर वर्गों को अधिकार दिलाने के लिए समर्पित रहा।
उन्होंने शिक्षा, समानता और अधिकारों की लड़ाई में अपना पूरा जीवन खपा दिया। ‘शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो’ जैसे उनके संदेश आज भी युवाओं को प्रेरणा देते हैं।
हर साल की तरह इस वर्ष भी देशभर में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धांजलि सभाएं, रैलियां और विचार गोष्ठियां आयोजित की जाती हैं। लोग उनके विचारों को आत्मसात करते हुए सामाजिक समरसता की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प लेते हैं।
डॉ. अंबेडकर का जीवन एक प्रेरणा है कि कठिन परिस्थितियों में भी अपने अधिकारों और समाज की बेहतरी के लिए डटे रहना कितना जरूरी है। उनकी विरासत आज भी भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ बनी हुई है।









