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छत्तीसगढ़ में आयकर विभाग की बड़ी कार्रवाई: 7 करोड़ नकद बरामद, 18 लॉकर सील, 45 ठिकानों पर छापे जारी

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रायपुर-

स्टील कारोबार से जुड़े व्यापारियों पर आयकर विभाग की छापेमारी दूसरे दिन भी जारी रही। राजधानी रायपुर और आसपास के इलाकों में की गई इस कार्रवाई में टीमों को लगभग 7 करोड़ रुपये नकद, 18 बैंक लॉकर, बड़ी मात्रा में जमीन-जायदाद के कागजात, कंप्यूटर हार्ड डिस्क और लेनदेन रजिस्टर मिले हैं। कुल 45 ठिकानों पर दबिश दी जा चुकी है, जबकि 5 नए स्थानों को भी सर्च लिस्ट में जोड़ा गया है।

सिलतरा इंडस्ट्रियल एरिया में सबसे बड़ी कार्रवाई

सिलतरा स्थित देवी स्पंज, ओम स्पंज और हिंदुस्तान क्वाइल के ठिकानों पर अधिकारियों ने शुक्रवार को फिर सर्च ऑपरेशन चलाया। इसके अलावा रायपुर के आनंदम क्षेत्र में विनोद सिंगला और रवि बजाज के घरों पर भी टीमों ने दस्तावेज खंगाले।

सूत्रों के अनुसार आयकर अधिकारी कई हार्ड डिस्क, कैश बुक, लेनदेन रजिस्टर और जमीन सौदों से जुड़े कागजों की गहन जांच कर रहे हैं। प्रारंभिक जांच में रियल एस्टेट निवेश और वास्तविक आय छुपाने के कई प्रमाण सामने आए हैं।

एमएस पाइप फैक्ट्रियों और रियल एस्टेट कारोबारों पर भी सवाल

छापेमारी में सामने आया कि दोनों एमएस पाइप निर्माण इकाइयाँ—इस्पात इंडिया सिलतरा से संबद्ध फैक्ट्रियाँ—पिछले कुछ वर्षों के आयकर रिटर्न में बड़े अंतर छोड़ रही थीं। प्लांट संचालकों विकास अग्रवाल, विपिन अग्रवाल और अरविंद अग्रवाल, जो रियल एस्टेट कारोबार से भी जुड़े बताए जाते हैं, उनके आवास और दफ्तरों की भी जांच की गई।
कारोबारियों के चार्टर्ड अकाउंटेंट और रायगढ़ के व्यापारी प्रतीक गोयल के यहाँ भी आयकर टीम पहुँची हुई है।

200 अधिकारियों की संयुक्त टीम कर रही ऑपरेशन

गुरुवार को लगभग 200 अधिकारियों और कर्मचारियों की संयुक्त टीम ने टैक्स चोरी, बोगस बिलिंग और आय छुपाने की शिकायतों के आधार पर छापेमारी शुरू की थी। पहले ही दिन कई दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड में गंभीर अनियमितताएँ मिली थीं, जिसके बाद सर्च ऑपरेशन का दायरा बढ़ा दिया गया।

फर्जी बिलिंग और ब्लैक मनी का खुलासा

छापों में करोड़ों रुपये की फर्जी बिलिंग से जुड़े दस्तावेज, लूज़ पेपर और दूसरे राज्यों की फर्मों के नाम पर जारी बिल भी मिले हैं। विभाग अब उन सभी फर्मों और व्यक्तियों को जांच के दायरे में ला रहा है जिनके नाम इन बिलों में उपयोग किए गए थे।

प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि कई व्यापारियों ने अपनी अघोषित आय (ब्लैक मनी) को जमीन-जायदाद में निवेश किया है। वास्तविक कीमत से कम मूल्य दिखाने, आय छिपाने और लेनदेन में गड़बड़ी जैसे कई सबूत मिले हैं।

विभाग अब सभी प्रॉपर्टी पेपर, रजिस्ट्री दस्तावेज और आय के स्रोत की विस्तृत जांच कर रहा है।

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