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किसानों की धान खरीदी में अनियमितता, उपजाऊ जमीन होने पर भी कम तौल; किसान परेशान

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शक्ति संवाददाता – योगेन्द्र राठौर 

जांजगीर-चांपा/शक्ति/कोरबा।
जिले के कई ग्रामों में धान खरीदी को लेकर किसानों में भारी नाराज़गी देखने को मिल रही है। किसानों का आरोप है कि उनकी जमीन पूरी तरह उपजाऊ होने के बावजूद प्रति एकड़ मिलने वाली धान खरीदी में भारी कटौती की जा रही है। जहां सामान्य रूप से एक एकड़ में 21–22 क्विंटल धान खरीदी का आंकलन किया जाता है, वहीं कई किसानों के यहां सिर्फ 16–18 क्विंटल तक ही खरीदी दिखाई जा रही है।

किसानों का आरोप: उपजाऊ जमीन को भी “कम उपज वाली” दिखाया जा रहा
किसानों ने बताया कि—
उनकी जमीन उपजाऊ और सिंचित है
पैदावार हर साल सामान्य से अधिक होती रही है
बावजूद इसके इस बार पटवारी, आरआई और संबंधित विभाग के अधिकारियों द्वारा उपज कम दिखा दी गई है
कई किसानों से कहा गया कि उनकी जमीन “उपजाऊ नहीं” है, जिस पर किसान आपत्ति जता रहे है

किसानों की परेशानी
किसानों के अनुसार—
कम उपज दिखाए जाने से सीधे-सीधे धान खरीदी में नुकसान हो रहा है
किसान अपनी वास्तविक उपज सरकार को बेच नहीं पा रहे
कई किसानों के पास अधिक जमीन होने के बाद भी उनसे कम तौल लिया जा रहा है
इससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ रहा है

किसकी लापरवाही?
किसानों ने आरोप लगाया है कि—
पटवारी व आरआई द्वारा सही सर्वे नहीं किया जा रहा
खेत की वास्तविक स्थिति एवं उपज को दर्ज नहीं किया गया
विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है
कई किसानों ने कहा कि लगातार शिकायत करने पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई
किसानों की मांग

किसानों की मुख्य मांगें—
1. खेतों का दोबारा सर्वे कराया जाए
2. उपजाऊ जमीन का सही मूल्यांकन किया जाए
3. धान खरीदी में की गई कटौती को सुधार कर सही तौल किया जाए
4. जिम्मेदार अधिकारियों पर जांच एवं कार्रवाई की जाए
किसान नेताओं की प्रतिक्रिया

स्थानीय किसान नेताओं का कहना है कि—

“यह सीधा-सीधा किसानों के अधिकारों का हनन है। जहां 22 क्विंटल धान होना चाहिए, वहां 16–18 क्विंटल दिखाकर किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा रहा है। सरकार को तत्काल संज्ञान लेना चाहिए।”
अगला कदम
किसानों का कहना है कि यदि समस्या का समाधान जल्द नहीं हुआ तो—
वे जनपद कार्यालय
तहसील कार्यालय
कृषि विभाग
और कलेक्टर कार्यालय
में सामूहिक ज्ञापन सौंपेंगे।

 

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