अमेरिका में इमिग्रेशन पॉलिसी को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़े कदम उठाए हैं। प्रशासन ने कुल 85,000 वीज़ा रद्द कर दिए हैं, जिनमें 8,000 से अधिक स्टूडेंट वीज़ा शामिल हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने पुष्टि की है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार दोगुने छात्र वीज़ा रद्द हुए हैं।
विभाग के मुताबिक जिन लोगों के वीज़ा रद्द किए गए हैं, उन पर अमेरिका में तय समय से अधिक ठहरने, आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने और चरमपंथी विचारों का समर्थन करने जैसे आरोप लगे थे।
भारतीय H-1B आवेदकों की अपॉइंटमेंट भी आगे बढ़ी
अमेरिका ने H-1B वीज़ा के भारतीय आवेदकों को एक और झटका दिया है। भारत में अमेरिकी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर घोषणा की कि जिन लोगों की वीज़ा अपॉइंटमेंट 2026 तक पोस्टपोन की गई है, उन्हें अब इंटरव्यू के लिए नई तारीख पर ही पहुँचना होगा।
ट्रंप प्रशासन का सुरक्षा एजेंडा केंद्र में
विदेश विभाग ने X पर पोस्ट करते हुए कहा कि
“जनवरी से अब तक 85,000 वीज़ा रद्द किए जा चुके हैं, और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तथा विदेश मंत्री मार्को रुबियो की ओर से यह कार्रवाई फिलहाल जारी रहेगी।”
पोस्ट के साथ जारी फोटो में ट्रंप ‘Make America Safe Again’ के स्लोगन के साथ नजर आ रहे हैं। इससे साफ है कि वीज़ा नीति में सख्ती को प्रशासन अपनी सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहा है।
यहूदी विरोधी और चरमपंथी समूहों से जुड़े छात्रों पर भी कार्रवाई
CNN की रिपोर्ट के अनुसार, रद्द किए गए वीज़ा में से बड़ी संख्या उन छात्रों की है जो:
गाज़ा मुद्दे पर प्रदर्शन में शामिल रहे,
जिन पर यहूदी विरोधी नारों का आरोप लगा,
या जिनके चरमपंथी संगठनों से जुड़े होने के इनपुट मिले।
इसके अलावा, कई वीज़ा DUI (ड्रिंक एंड ड्राइव), हमला, चोरी और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े अपराध के कारण भी निरस्त किए गए हैं। विदेश विभाग के मुताबिक ऐसे लोग अमेरिकी नागरिकों के लिए संभावित जोखिम बन सकते हैं, इसलिए उन पर कड़ा एक्शन लिया गया है।









