= विधानसभा में आशाराम नेताम के सवाल पर सीएम साय के जवाब से निराशा =
= दूरस्थ संभाग होने के बावजूद मिली उपेक्षा =
= संभाग के हजारों पक्षकारों और वकीलों में मायूसी =
-अर्जुन झा-
जगदलपुर। सात जिलों वाले आदिवासी बाहुल्य बस्तर संभाग को राज्य की भाजपा सरकार ने बड़ी निराशा दी है। संभाग मुख्यालय जगदलपुर में उच्च न्यायालय की खंडपीठ स्थापित होने की उम्मीद थी और लोग इसकी मांग भी पुरजोर ढंग से करते आ रहे थे, लेकिन सरकार ने जगदलपुर को बड़ा झटका दे दिया है। सरकार ने कह दिया है कि संभाग मुख्यालय जगदलपुर में हाईकोर्ट की खंडपीठ स्थापित नहीं की जाएगी। सरकार के इस फैसले ने पूरे संभाग में घोर निराशा की लहर फैला दी है। उच्च न्यायालय में जिनके मामले लंबित हैं, वे तमाम पक्षकार, दीगर लोग और संभाग भर के वकील सरकार के इस फैसले न सिर्फ निराश हैं,बल्कि उनमें गहरी नाराजगी भी देखी जा रही है।
दरअसल कांकेर विधायक आशाराम नेताम ने विधानसभा के मौजूदा सत्र में पूछा था कि जगदलपुर में बिलासपुर उच्च न्यायालय की खंडपीठ कब तक स्थापित की जाएगी। इसके जवाब में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने स्पष्ट कह दिया है कि जगदलपुर में उच्च न्यायालय की खंडपीठ स्थापित करने की कोई योजना नहीं है। बस्तर संभाग में आने वाले सातों जिले क्रमशः बस्तर, सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, कांकेर और कोंडागांव लगभग पूरी तरह आदिवासी बाहुल्य जिले हैं। यहां के आदिवासियों को 25 वर्षों के बाद भी न्याय पाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। इन सातों जिलों के प्रबुद्धजन और अधिवक्ता बस्तर संभाग मुख्यालय जगदलपुर में हाईकोर्ट की खंडपीठ स्थापना की मांग लंबे समय से करते आ रहे हैं। इस संबंध में कांकेर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर व कोंडागांव के अधिवक्ताओं द्वारा शासन- प्रशासन स्तर पर पत्राचार भी किया जाता रहा है, लेकिन आदिवासी बाहुल्य बस्तर फिर एक बार छलने की कगार पर है क्योंकि यहां हाईकोर्ट की सर्किट बेंच तो दूर खंडपीठ भी खोलने पर भी सरकार विचार नहीं कर रही है। सोमवार को विधानसभा के शीतकालीन सत्र में सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी के कांकेर सीट से विधायक आशाराम नेताम खंडपीठ को लेकर सवाल लगाया, जिस पर सरकार का जवाब यहां के लोगों के लिए बेहद ही निराशाजनक है। स्वयं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जवाब दिया है कि जगदलपुर में बिलासपुर उच्च न्यायालय का खंडपीठ नहीं खुलेगा। ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन को 25 वर्ष हो गए हैं और उसके बावजूद बस्तर को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है। बस्तर संभाग के आदिवासियों के हजारों न्यायालयीन मामले उच्च न्यायालय बिलासपुर में लंबित है और वह वर्षों से न्याय पाने की उम्मीद में बैठे हैं।

ये दूरी और परेशानियां
छत्तीसगढ़ राज्य बनने के 25 वर्षों बाद भी हाईकोर्ट खंडपीठ नहीं खुल पाना अपने आप में विचारणीय प्रश्न है। सबसे बड़ी बात यह है कि न्यायधानी बिलासपुर से बस्तर प्रदेश का सबसे दूरस्थ संभाग है। जगदलपुर से बिलासपुर की दूरी लगभग 550 किलोमीटर है। वहीं सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर और नारायणपुर जिले तो 700 से लेकर 800 किलोमीटर दूर स्थित हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि बिलासपुर उच्च न्यायालय जाने के लिए यहां के लोगों को किस कदर मुश्किलों के दौर से गुजरना पड़ता होगा। इसके बावजूद बस्तर की अनदेखी पर सवाल उठने लगे हैं।

दबाव बनाएंगे विधायक भाजपा?
राज्य में भाजपा की सरकार है, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बस्तर संभाग के निवासी हैं, संभाग की 11 विधानसभा सीटों में से 8 पर भाजपा के विधायक हैं। जिला भाजपा अध्यक्ष किरण सिंह देव जगदलपुर सीट से विधायक चुने गए हैं। इतना सब कुछ होने के बावजूद बस्तर को उच्च न्यायालय की खंडपीठ से वंचित करना बस्तर संभाग के साथ सरासर ज्यादती है। लोगों को उम्मीद है कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण सिंह देव समेत संभाग के आठों विधायक इस मसले पर राज्य सरकार पर जरूर दबाव बनाएंगे।









