रायपुर संवाददाता – रघुराज
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र में मंगलवार को नल-जल योजना को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। भाजपा विधायक और वरिष्ठ नेता *अजय चंद्राकर* ने अपनी ही पार्टी की सरकार को तीखे सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की मौजूदगी में चंद्राकर ने योजना की क्रियान्वयन व्यवस्था, बजट उपयोग और लाभार्थियों की वास्तविक स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि “विधानसभा में केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि धरातल की हकीकत भी देखनी होगी।”
चंद्राकर ने सदन में कहा कि नल-जल योजना की शुरुआत गांव-गांव पेयजल सुविधा के उद्देश्य से हुई थी, लेकिन कई स्थानों पर पाइपलाइन तो बिछाई गई, पर पानी नहीं पहुंचा। उन्होंने संबंधित विभाग से जवाब मांगा कि जिन क्षेत्रों में काम अधूरा है, वहां जिम्मेदारी तय की गई या नहीं। इसपर सदन में कुछ देर के लिए तीखी बहस भी हुई।
विधानसभा में माहौल तब और गर्म हो गया जब चंद्राकर ने अध्यक्ष *डॉ. रमन सिंह* की ओर मुखातिब होते हुए कहा, “अध्यक्ष जी, गलती आपकी है, आपने ही ये व्यवस्था की थी और अब समस्या सामने है।” इस पर सदन में कुछ क्षणों के लिए शोरगुल मच गया। विपक्षी विधायकों ने भी समर्थन में नारे लगाए और कहा कि सरकार को जमीनी हकीकत बताना जरूरी है।
अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने स्थिति को शांत करने की कोशिश करते हुए चंद्राकर से कहा कि “सदन की गरिमा बनाए रखें।” उन्होंने दोनों पक्षों से अनुरोध किया कि मामले को तथ्यों के आधार पर रखा जाए और जल संसाधन विभाग विस्तृत रिपोर्ट पेश करे। इसके बाद सदन में थोड़ी देर के लिए माहौल सामान्य हुआ।
सूत्रों के अनुसार, अजय चंद्राकर ने इस मुद्दे की लिखित जानकारी भी सदन सचिवालय को सौंपी है, जिसमें कई जिलों के प्रोजेक्ट अधूरे रहने और बजट के ठीक से उपयोग न होने के सबूत पेश किए गए हैं। उन्होंने कहा कि “हम जनता की सेवा के लिए आए हैं, अगर हमारी ही सरकार में योजनाएं अधूरी हैं तो सवाल उठाना हमारा कर्तव्य है।”
ज्ञात हो कि नल-जल योजना के तहत छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रत्येक घर तक नल के माध्यम से शुद्ध पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। केंद्र और राज्य दोनों की संयुक्त फंडिंग से यह योजना चल रही है, जिसके तहत ग्रामीण इलाकों में हजारों प्रोजेक्ट स्वीकृत किए गए हैं। मगर, लगातार मिल रही शिकायतों के चलते विपक्ष और अब सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अजय चंद्राकर का यह रुख सरकार के अंदर कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष की झलक देता है। वहीं सत्तारूढ़ दल के कुछ सदस्यों ने माना कि “सवाल उठाना लोकतंत्र की सेहत के लिए अच्छा है।” आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य सरकार नल-जल योजना पर कौन से ठोस कदम उठाती है।







