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अजगरबहार सेक्टर के मितानिनों के माध्यम से कुष्ठ का सघन जांच और खोज अभियान जारी पढ़े पूरी खबर…..

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कोरबा संवाददाता – कृष्णा दास 

कोरबा न्यूज 36गढ़:– शासन के दिशा- निर्देश एवं कलेक्टर के मार्गदर्शन और सीएमएचओ के मॉनिटरिंग पर जिले से कुष्ठ भगाने की तैयारी की गई है। कोरबा विकास खंड के अंतर्गत संकुल अजगरबहार के सभी गांवों में कुष्ठ बीमारी की सघन जांच खोज अभियान जारी है, इस सघन जांच में सभी गांव के मितानिनों द्वारा जांच किया जा रहा है। यह खोज अभियान 8 दिसम्बर 2025 से प्रारंभ हुआ है जो 31 दिसंबर 2025 तक चलेगा।

मितानिनों द्वारा अपने पारा मोहल्ला के प्रत्येक घर में जाकर 2 वर्ष के बच्चे को छोड़कर अन्य सभी व्यक्ति की जांच कर रहे हैं। लक्षण के आधार पर शंकाप्रद मरीज को ढूंढ कर ऐसे व्यक्तियों की सूची तैयार कर रहे हैं। इस सूची को अपने एमटी, प्रभारी डॉक्टर आर.एच.ओ या सी.एच.ओ के माध्यम से प्रारंभिक जांच कर सूची को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में दे रहे हैं। मेडिकल ऑफिसर इन सूचीबद्ध मरीजों को बुला कर इसकी सत्यापन करेंगे। कुष्ठ की पुष्टि होने पर इनका पंजीयन किया जाएगा। दस्तावेजी कार्यवाही के बाद इनको सुपरवाइजरी डोस खिलाएंगे और उन्हें एम.डी.टी दवा देंगे। मरीज को अगली दवाई की स्ट्रिप उन्हें मितानिन के माध्यम से उन्हें अपने गांव में हो मिल जाती है। इसे सभी मरीजों को अच्छे काउंसलिंग करनी चाहिए। आम जनता से निवेदन है कि आप सभी अपनी जांच करा लीजिए।
कुष्ठ का शंका कब करें
कुष्ठ के लक्षणों में शरीर के किसी भी भाग के चमड़ी के रंग में बदलाव दाग जिसमे सुन्नपन हो, धब्बे में मोटापन एवं उभार हो, तेलिया चमकदार चेहरा हो चमड़ी में गठान हो, कान में मोटापन, गठानें, चेहरे में गठानें, आंख का बंद न होना, आंख से आंसू आना, भौहें का बाल का झड़ जाना, नाक का चिपटा एवं चिपका हुआ होना, शरीर के बाहर के नसें मोटा होना, कोहनी, घुटना एवं एडी में मामूली से लगने से ज्यादा दर्द का होना एवं झुनझुनी होना। दाग धब्बे की जगह पर ठंडे गरम का आभास न होना, हथेली में सुन्नपन का शिकायत, पैर में सुन्नपन का शिकायत, तलवे में बिना दर्द के घाव, घाव का न भरना, हाथ की उंगलियां मूड जाना, हाथ से किसी वस्तु को पकड़ न पाना, पकड़ ढीला होना शर्ट या जैकेट के बटन न लगा पाना, हाथ पैर में झुनझुनी का होना, हाथ के उंगली एवं पैर के अंगूठे में दर्द का होना। हाथ पैर में बिना दर्द के धावक होना, घाव का फट जाना, गडढा हो जाना, घाव का न भरना, पैर में कमजोरी का होना, पैर से चप्पल का निकल जाना और पता न चलना, हाथ एवं पैर का झूल जाना आदि शामिल है।

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