सिटीजन जर्नलिस्ट इरफान खान/बालोद –
शीतकालीन सत्र में जब विधानसभा में संजारी बालोद से लोकप्रिय किसान हित में सदन में अपनी बातों को तथ्यों के साथ बोली तो कृषि व सहकारिता मंत्री लाजवाब हो गए और जवाब में गोलमोल करते नजर आए। साथ ही सरकार द्वारा ऑनलाइन टोकन में हो रही धान बिक्री में के बारे में सदन में अच्छा खासा मुद्दा बना कहा गया कि एक तो ऑनलाइन टोकन काटने की अंतिम तिथि खत्म होने पर है और ऑफलाइन लाइन टोकन ज्यादातर सत्ताधारी पार्टी के लोगों के ही लिए जा रहे हैं ।
किसान इतनी कड़के ठंड में धान संग्रहण केंद्र के आसपास सोने को मजबूर ताकि जब ऑनलाइन टोकन काटना हो तो पहले हो जाए उसमें भी जब अधिकतर नेटवर्क फेल सर्वर डाउन जैसे समस्या आ रही है जिसमें तय समय में तय मानक पर सरकार द्वारा धान की खरीदी नहीं हो पा रही।
श्रीमती सिन्हा ने आरोप भी लगाया के मेरे क्षेत्र के ज्यादातर किसानों की समस्या है अगर ऑनलाइन टोकन नहीं कट रही तो ऑफलाइन में टोकन काटा जाए उसमें।भी ऐसे ऐसे किसानों के टोकन काटे जा रहे है जो ज्यादातर सत्ताधारी पार्टी के या तो नेता है या उनके करीबि। पहले यूरिया खाद नहीं मिल पाई जिसमें फसल के उत्पादन में कमी हुई प्रति किसान 21 क्विंटल धान खरीदी करने की बात कही गई फिर आनावरी कम होने की स्थिति हुई तो जानबूझकर धान की निर्धारित मात्रा कम ले रही है सरकार ।
किसान द्वारा तय समय में धान नहीं बेचा गया तो निश्चित ही धान पड़े पड़े खराब होंगे या मजबूरी में धान कोचियों को कम दामों में बेचने पड़ेंगे। संगीता सिन्हा ने सदन के पटल पर धान खरीदी में हो रही परेशानी में पहले बताया 21क्विंटल प्रति किसान बेच सकता है उसमें कम खरीदी जा रही , वारदाना का वजन 700ग्राम घटाकर 500 किया गया था इसमें भी एक बारदाने में 40किलो 700 ग्राम वाले में नाप कर लिया जा रहा है जिसमें किसानों को आधा किलो ऊपर का वजन अधिभार पड़ रहा है।
माननीय विधायक ने सरकार को सुझाव में कहा धान खरीदी केंद्र में छोटे व बुजुर्ग किसानों के धानो को ऑफलाइन लिए जाए क्योंकि इनके पास संसाधन की कमी होने के कारण समय पर धान नई बेच प रहे है। टोकन सिस्टम से जुड़े सलाह दी के ऑनलाइन टोकन थोड़े में लिमिट भर जाता है फिर नेटवर्क फेल होंजती है इसलिए समिति 75 फीसदी खरीदीऑफलाइन व 25 फीसदी ऑनलाइन खरीदी करे।









