Home मुख्य ख़बरें सद्भाव, सत्य और समता के प्रतीक: संत गुरु घासीदास जयंती पर विशेष

सद्भाव, सत्य और समता के प्रतीक: संत गुरु घासीदास जयंती पर विशेष

40
0

संत गुरु घासीदास जी, छत्तीसगढ़ की महान संत परंपरा के एक उज्ज्वल स्तंभ हैं, जिनका जन्म 18 दिसंबर 1756 को रायपुर जिले के गिरौदपुरी गांव में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन में सत्य, अहिंसा, समानता और मानवता की स्थापना के लिए सतत संघर्ष किया। उनका संदेश “सत्य बोलो, भेदभाव छोड़ो, जीवन को पवित्र बनाओ” आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उनके समय में था।

गुरु घासीदास जी ने समाज में व्याप्त जात-पात, ऊंच-नीच और अन्य सामाजिक कुरीतियों का विरोध किया। उन्होंने ‘सतनामी संप्रदाय’ की स्थापना की, जो सत्य और आध्यात्मिक समानता पर आधारित है। वे अपने अनुयायियों को “मनखे-मनखे एक समान” का उपदेश देते थे, जिसका अर्थ है कि सभी मनुष्य समान हैं और किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।

उनकी जयंती पर न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि देशभर में श्रद्धा के साथ आयोजन किए जाते हैं। गिरौदपुरी धाम, जो आज एक प्रमुख तीर्थस्थल बन चुका है, हर साल लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।

आज जब समाज फिर से भेदभाव, असमानता और असत्य के दौर से गुजर रहा है, ऐसे समय में संत गुरु घासीदास जी के विचार हमें एकजुटता, भाईचारे और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उनकी जयंती हमें यह याद दिलाती है कि सामाजिक बदलाव के लिए दृढ़ संकल्प और सही सोच सबसे बड़े हथियार हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here