Home चर्चा में कौन जहर घोल रहा है कांकेर जिले की शांत फिजां में?

कौन जहर घोल रहा है कांकेर जिले की शांत फिजां में?

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बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा

कन्वर्जन को लेकर बिगड़ रहे हैं गांव गांव में हालात 
 पहले दो चर्चों में हुई आगजनी, फिर जला दिया गया शीतला माता मंदिर 

जगदलपुर। नक्सलवाद के नासूर से मुक्त होते बस्तर में अब कन्वर्जन की कड़वाहट घुलने लगी है। बस्तर संभाग के कांकेर जिले लगातार अप्रिय घटनाएं हो रही हैं। इन घटनाओं की जड़ में कन्वर्जन ही है। हाल के दिनों में कांकेर जिले में हुई दो घटनाओं को देख लगने लगा है कि अमन की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे बस्तर को अब दूसरे तरीके से अशांत करने की कोशिशें की जाने लगी हैं। इसमें एक उभरते संगठन की एंट्री की भी चर्चा है।
बस्तर संभाग दशकों से नक्सलवाद का दंश झेलता आया है। यह आंतरिक आतंकवाद सैकड़ों लोगों की बलि ले चुका है। वहीं दूसरी ओर कन्वर्जन के जरिए बस्तर की समृद्ध संस्कृति और गौरवशाली परंपराओं की बलि चढ़ाई जा रही है। छल, प्रपंच और प्रलोभन के वशीभूत होकर बस्तर के हजारों आदिवासी अपने मूल धर्म से विमुख हो चुके हैं और दूसरे धर्म की परंपराओं एवं पूजा पद्धति को अपना चुके हैं। आदिवासी समुदाय के जागरूक और पढ़े लिखे लोग तथा जनप्रतिनिधि कन्वर्जन के विरोध में उतर आए हैं। मतांतरण गतिविधियों से जुड़े लोगों के प्रवेश पर गांव गांव में पाबंदी लगाई जा रही है, मतांतरित हो चुके लोगों की मूल धर्म में वापसी के लिए मुहिम चलाई जा रही है। अब मतांतरित परिवार भी स्वस्फूर्त होकर अपनी जड़ों से पुनः जुड़ने लगे हैं। ऎसी गतिविधियां ज्यादातर कांकेर जिले में चल रही हैं। अब उसी कांकेर जिले में दूसरे तरीके से अशांति फैलाने के प्रयास शुरू हो गए हैं। कांकेर जिले के अंतागढ़ थाना क्षेत्र के कान्हा गांव में बीती रात एक ऎसी घटना को अंजाम दे दिया गया, जिसने मूल निवासियों की आत्मा और आस्था को झकझोर कर रख दिया है। गांव के प्रमुख आस्था केंद्र शीतला माता मंदिर में अज्ञात तत्वों ने आगजनी कर दी। देवी देवताओं की प्रतिमाओं, ध्वज, वस्त्र आदि जला दिए गए। जैसे यह खबर सामने आई, ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। नाराज ग्रामीण मंदिर के पास बैठ कर विरोध जताने लगे। ग्रामीणों का आरोप है कि देवी देवताओं और सनातन धर्म को न मानने वाले दूसरे समुदाय के लोगों ने मंदिर में आगजनी की है। ग्रामीण सीधे तौर पर एक धर्म विशेष का नाम ले रहे हैं। वहीं कुछ का कहना है कि लाठी डंडों से लैस दर्जनों लोग आए थे, जो एक उभरते दलित संगठन से जुड़े हैं, आगजनी की यह करतूत, उन्हीं लोगों ने की होगी। बहरहाल गांव में पुलिस बल तैनात है।

सुलग चुका है बड़े तेवड़ा गांव
उल्लेखनीय है कि कांकेर जिले के ही आमाबेड़ा थाना क्षेत्र का ग्राम बड़े तेवड़ा कन्वर्जन से उपजे विवाद की आग में झुलस चुका है। यह कुछ ही दिनों पहले की घटना है। बड़े तिवड़ा निवासी 70 वर्षीय चमरा राम सलाम की मृत्यु 16 दिसंबर को हो गई थी। चमरा राम मतांतरित हो चुके थे। वे मूलतः आदिवासी थे। गांव और आदिवासी समाज के लोग चमरा राम के अंतिम संस्कार की विधि पर आपत्ति जताते हुए सामने आ गए। गांव में अप्रिय स्थिति निर्मित हो गई। दो धर्म जला दिए गए। भीड़ मरने मारने पर उतारू हो गई थी। पत्थरबाजी की घटना भी हुई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल एवं कार्यपालिक दंडाधिकारी द्वारा तत्काल आवश्यक कदम उठाए गए। घटना के दौरान कुछ संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा। इस घटना में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अंतागढ़ आशीष बंछोर सहित 20 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे। सभी घायलों को तत्काल प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया। गंभीर रूप से घायल पुलिसकर्मियों को बेहतर उपचार हेतु उच्च चिकित्सा केंद्रों में रेफर किया गया। वर्तमान में 8 पुलिस कर्मी कांकेर एवं रायपुर के अस्पतालों में भर्ती हैं। गांव में पुलिस बल की तैनाती की गई है। वर्तमान में क्षेत्र की स्थिति पूर्णतः शांतिपूर्ण एवं नियंत्रण में है।

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