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छह करोड़ की सड़क बनी भ्रष्टाचार की साक्षी: अंबिकापुर में नई बनी सड़क रातों-रात मिट्टी से भर दी गई, जनता में आक्रोश

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रायपुर संवाददाता – रघुराज 

अंबिकापुर। सरगुजा जिले के अंबिकापुर शहर में नगर निगम क्षेत्र के अंतर्गत छह करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़क कुछ ही घंटों में खोखली साबित हो गई। निर्माण पूरा हुए अभी चंद दिन ही हुए थे कि रात के अंधेरे में निगम के ट्रैक्टरों द्वारा सड़क पर मिट्टी व कचरे की परत डाल दी गई। सुबह जब लोगों ने यह दृश्य देखा, तो आक्रोश फूट पड़ा और पूरे इलाके में भ्रष्टाचार की नई कहानी पर चर्चा शुरू हो गई।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह सड़क वर्षों के इंतजार के बाद बनी थी। लोगों को उम्मीद थी कि नई सड़क से आवागमन की समस्या खत्म होगी, लेकिन कुछ ही समय में सड़क का हाल देखकर हर कोई हैरान है। लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में बहुत घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया, जिसके कारण सड़क की सतह टूटने लगी। और जब मामला दबाने की कोशिश शुरू हुई, तो रात में नगर निगम के ट्रैक्टर भेजकर मिट्टी व कचरा डाल दिया गया ताकि खराब हिस्से को छिपाया जा सके।

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप

घटना के बाद कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने सवाल उठाया है कि आखिर छह करोड़ रुपये की राशि खर्च करने के बाद भी सड़क की गुणवत्ता इतनी कमजोर कैसे रही। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यह बिना जन निगरानी और बिना मानक के निर्माण का नतीजा है। सूत्रों के मुताबिक निर्माण कार्य स्थानीय ठेकेदार को दिया गया था, पर निगरानी और गुणवत्ता जांच में भारी लापरवाही बरती गई।

नगर निगम के अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। नागरिकों ने कहा कि जब सड़क निर्माण का काम पूरा हुआ, तो निगम इंजीनियरों ने निरीक्षण किए बिना ही ठेकेदार का बिल पास कर दिया। अब, जब खराबी उजागर हुई, तो उसी निगम के वाहनों से मिट्टी डालकर मामले को छिपाने की कोशिश की जा रही है।

निगम प्रशासन ने दी सफाई, पर जनता असंतुष्ट

घटना पर जब मीडिया ने नगर निगम से सवाल किए, तो प्रशासन ने सफाई देते हुए कहा कि ट्रैक्टरों द्वारा सड़क पर “सुरक्षा कारणों” से मिट्टी डाली गई ताकि फिसलन से बचाव हो सके। निगम ने इसे “अस्थायी कार्यवाही” बताया। लेकिन नागरिकों को यह तर्क स्वीकार नहीं हुआ। उनका कहना है कि अगर सड़क इतनी जल्दी फिसलन भरी हो रही है, तो इसका मतलब है कि निर्माण में गड़बड़ी है।

स्थानीय समाजसेवी संगठनों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे।

विपक्षी दलों ने किया हमला

इस मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। विपक्षी दलों ने इस घटना को “भ्रष्टाचार का जीता-जागता उदाहरण” बताया। उन्होंने कहा कि “सड़क निर्माण के नाम पर जनता के पैसे की खुलेआम लूट की जा रही है।” विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि ठेकेदार, संबंधित अभियंता और निगम अधिकारी – तीनों पर एफआईआर दर्ज की जाए और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि छह करोड़ की लागत वाले प्रोजेक्ट का कोई सार्वजनिक ऑडिट क्यों नहीं हुआ। अगर निर्माण सही प्रक्रिया से होता, तो सड़क यूं रातों-रात नहीं बिगड़ती।

जनता की मांग – पारदर्शिता और जवाबदेही

स्थानीय लोगों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ रहा है। निवासी चाहते हैं कि नगर निगम कार्यों की पारदर्शी निगरानी व्यवस्था लागू की जाए। प्रत्येक बड़े निर्माण कार्य की जानकारी नगर पोर्टल और सूचना बोर्ड पर सार्वजनिक की जाए, ताकि नागरिक स्वयं निगरानी कर सकें।

अंबिकापुरवासियों का कहना है कि “हम टैक्स भरते हैं, ताकि शहर बेहतर बने – न कि भ्रष्टाचार का दलदल बन जाए।” उनका मानना है कि यह मामला केवल सड़क का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही का है।

जांच की मांग पर बढ़ा दबाव

घटना से शहर की छवि पर भी असर पड़ा है। अब दबाव बढ़ता जा रहा है कि जिला प्रशासन खुद जांच करे और दोषियों को चिन्हित करे। कई सामाजिक संगठनों ने राज्य सरकार से भी हस्तक्षेप की मांग की है।

छह करोड़ रुपए की सड़क कुछ ही घंटों में ‘कूड़े का मैदान’ बन गई — यह दृश्य न केवल अंबिकापुर बल्कि पूरे प्रदेश प्रशासन के लिए चेतावनी है कि जब तक पारदर्शिता और ईमानदारी व्यवस्था का हिस्सा नहीं बनती, तब तक ऐसी घटनाएं दोहराती रहेंगी।

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