अधिवेशन संवैधानिक मूल्यों की रक्षा एवं विधि के शासन को सशक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर… अधिवक्ता चितरंजय सिंह
अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद का १७वा राष्ट्रीय अधिवेशन राजस्थान के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक नगर बालोतरा में अत्यंत भव्य, अनुशासित एवं गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ जो देशभर से पधारे हजारों अधिवक्ताओं की सहभागिता, वैचारिक मंथन एवं संगठनात्मक एकता का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा।
इस अधिवेशन का केंद्रीय विषय
“भारतीय संविधान के ७५ वर्ष : सामाजिक सद्भाव” ने अधिवक्ताओं को आत्मचिंतन एवं राष्ट्रहित में सक्रिय भूमिका निभाने हेतु प्रेरित किया।
अधिवेशन के प्रथम दिवस देश पर सभी राज्यों से पधारे सम्मानित अधिवक्ता प्रतिनिधियों का आत्मीय स्वागत किया गया। उद्घाटन सत्र में परिषद के वरिष्ठ पदाधिकारियों, विद्वान वक्ताओं एवं अतिथियों द्वारा भारतीय संविधान के ७५ वर्षों की यात्रा, उसकी उपलब्धियों एवं समकालीन चुनौतियों पर विचार व्यक्त किए गए तो वहीं अधिवेशन का द्वितीय दिवस वैचारिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण एवं निर्णायक रहा, जब ४ महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए, जिनका पाठन हिंदी एवं अंग्रेजी दोनों भाषाओं में किया गया। प्रत्येक प्रस्ताव की एक-एक प्रति देशभर से उपस्थित सभी सम्मानित प्रतिनिधियों को उपलब्ध कराई गई तथा उनसे सुझाव, संशोधन एवं विचार आमंत्रित किए गए।

इन चार प्रस्तावों में से एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव—“न्यायालय के भीतर एवं बाहर शालीनता, शिष्टाचार और मर्यादा बनाए रखना”,का पाठन छत्तीसगढ़ प्रांत के प्रदेश महामंत्री धर्मेश श्रीवास्तव द्वारा किया गया।
आज २८ दिसम्बर रविवार को अधिवेशन के समापन दिवस पर प्रस्तुत चारों प्रस्तावों को गहन विचार-विमर्श, अवलोकन एवं सार्थक चर्चा उपरांत सर्वसम्मति से पारित किया गया। तद पश्चात अधिवेशन के अंतिम सत्र में राष्ट्रीय अधिवेशन गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अधिवेशन में पारित किए गए चार महत्वपूर्ण प्रस्ताव में प्रथम न्यायालयों एवं न्यायाधीशों की कमी के कारण वादकारियों को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा है, अतः
“Timely Judicial Appointments के माध्यम से Justice Delivery System को सुदृढ़ किया जाए।”
द्वितीय, न्यायपालिका पर राजनीतिक हमले निंदनीय हैं “Political attacks on Judiciary are condemnable.”
तृतीय, महिला अधिवक्ताओं के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक एवं गरिमामय कार्य वातावरण सुनिश्चित किया जाए “Creating a safe and dignified professional work environment for women advocates.”
चतुर्थ न्यायालय के भीतर एवं बाहर शालीनता, मर्यादा और गरिमा बनाए रखना अनिवार्य है“Maintain decency and decorum in and outside the courtroom.”
यह अधिवेशन इस दृष्टि से भी ऐतिहासिक रहा कि अधिवक्ताओं के लिए मेडिकल इंश्योरेंस पॉलिसी के साथ ही एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट की मांग से सहमति व्यक्त करते हुए केंद्रीय विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने मुख्य अतिथि की आसंदी से शीघ्र लागू करने का आश्वासन दिया,जो अधिवक्ता समाज के लिए एक बड़ी उपलब्धि के साथ अधिवक्ता परिषद की निरंतर संघर्षशील भूमिका का प्रमाण है।
विदित हो कि इस राष्ट्रीय अधिवेशन में अधिवक्ता परिषद, छत्तीसगढ़ प्रांत से बड़ी संख्या में सम्मानित अधिवक्ता प्रतिनिधियों ने सहभागिता की, जिनमें प्रमुख रूप से
धर्मेश श्रीवास्तव, प्रमोद तिवारी, सुनील पटेल, नवल सेन, झरना बांगर सिंह, झरना साहू, योगेश साहू, संगीता साहू, माण्डवी भारद्वाज, लता नायक, भरत सोनी, जगन्नाथ सविता, पूजा मोहिते, स्वाति शर्मा, रायमा वर्धन, भाव्या बांगर सिंह, अजय दास वैष्णव, नारायण पांडेय, जगरूप सिंह, दिलीप गुप्ता, राजेश यादव, संतोष यादव, दीनानाथ शर्मा, नारायण राम साहू, सन्यासी कसेर, तामेश्वर वर्मा, दीपक पटेल, राजनारायण त्रिपाठी, गणेश बघमार, भागचंद, ओंकार वर्मा, आरती दुआ, सुखराम कश्यप, अर्पित मिश्रा, सागर सोनी, भारती राठौर, सुचित्रा वर्धन, लक्ष्मी सैनी, संजयंदु पंड्या, जयंत सिंह ठाकुर, कौशल सिंह, रमेश यादव, कपूर सिंह, गंगा सिंह, महेश तिवारी, आशा जायसवाल, धनीराम यादव, कन्हैया प्रसाद, जय गोपाल अग्रवाल, अमरेंद्र गुप्ता, मुक्ता त्रिपाठी सहित शक्ति जिले से मालिक राम यादव_भूपेन्द्र सिंह, नरेन्द्र पटेल, रतन कसेर आदि अधिवक्तागण सम्मिलित रहे। उक्त जानकारी देते हुए अधिवक्ता परिषद शक्ति के जिलाध्यक्ष एवं उच्च न्यायालय अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने प्रदेश महामंत्री धर्मेश श्रीवास्तव के हवाले से
बताया कि अधिवक्ता समाज के हितों की रक्षा, न्यायिक व्यवस्था की मजबूती, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा एवं विधि के शासन को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में १७ वाँ राष्ट्रीय अधिवेशन मील का पत्थर सिद्ध हुआ है।









