बृजेश चतुर्वेदी /उदयपुर –
महेशपुर में आयोजित विशाल हिंदू सम्मेलन भव्यता और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक सम्मेलन में अनेक संत-महात्माओं की उपस्थिति के साथ जनप्रतिनिधि, विभिन्न विचारधाराओं से जुड़े बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं समाज के लगभग 25–30 प्रमुख प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम में क्षेत्र के करीब 2500 से अधिक लोगों की उल्लेखनीय उपस्थिति ने सम्मेलन को जनआस्था और सामाजिक एकता का सशक्त प्रतीक बना दिया।
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य सनातन संस्कृति की मूल भावना—एकता, सद्भाव, सेवा और सांस्कृतिक समरसता—को जन-जन तक पहुंचाना रहा। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। करमा नृत्य, शैला नृत्य, कुड़ूख नृत्य एवं सुआ नाचा जैसे पारंपरिक लोकनृत्यों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों के माध्यम से सम्मेलन में उपस्थित जनों एवं अतिथियों का सम्मान किया गया, जिसने कार्यक्रम को सांस्कृतिक उत्सव का रूप दे दिया।
कार्यक्रम के दौरान मातृशक्ति की सक्रिय सहभागिता विशेष रूप से उल्लेखनीय रही। महिलाओं ने अपने विचार व्यक्त करते हुए समाज में संस्कार, संस्कृति और संगठन की भूमिका पर प्रकाश डाला। वहीं उपस्थित संत-महात्माओं एवं समाज प्रमुखों ने हिंदू समाज की एकजुटता, आपसी भाईचारे और सामाजिक दायित्वों पर प्रेरणादायी विचार रखे।
सम्मेलन के समापन अवसर पर भारत माता की भव्य आरती संपन्न हुई, जिसके पश्चात सभी उपस्थित जनों को भोजन प्रसाद ग्रहण कराया गया। अंत में कल्याण मंत्र के उच्चारण के साथ कार्यक्रम का शांतिपूर्ण और भावनात्मक समापन किया गया। यह विशाल हिंदू सम्मेलन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रप्रेम की भावना को सुदृढ़ करने वाला प्रेरक आयोजन सिद्ध हुआ।









