बस्तर संवाददाता – अर्जुन झा
8 करोड़ की लागत से बन रही सड़क तीन माह से पड़ी है अधूरी हालत में
कलेक्टर की फटकार का भी नहीं हुआ पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों पर असर
बालोद। जिला मुख्यालय बालोद में बन रही एक सड़क बालोद शहर की तस्वीर बदलने देती, मगर केनवास पर आकार लेने से पहले ही ठेकेदार और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने इस तस्वीर पर पानी फेर दिया है।
बालोद में दल्ली चौक से रेलवे फाटक तक चल रहे रोड डिवाइडर और सड़क निर्माण कार्य ने आम जनता के लिए सिरदर्द पैदा कर दिया है। लगभग तीन महीने से जारी यह कार्य ठेकेदार की मनमानी और विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण ठप पड़ा है। आठ करोड़ की लागत से शुरू हुए इस प्रोजेक्ट को शहर की तस्वीर बदलने वाला बताया गया था, लेकिन अब यह अधूरा निर्माण
शहरवासियों के लिए परेशानी और धूल का कारण बन चुका है। दल्ली चौक से रेलवे फाटक तक सड़क को खोदकर महीनों से यूं ही छोड़ दिया गया है। ठेकेदार के काम की सुस्त गति और विभाग की अनदेखी ने निर्माण कार्य को अधर में लटका दिया है। नतीजतन, यातायात बाधित हो रहा है और सड़क किनारे रहने वाले लोगों को घरों से निकलना मुश्किल हो गया है। खोदी गई सड़क से पेयजल पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने के कारण कई घरों में पानी की
आपूर्ति प्रभावित हो रही है।इस समस्या से परेशान बालोद नगर के रहवासियों ने मंगलवार को पीडब्ल्यूडी कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन किया। नागरिकों ने चेतावनी दी कि यदि 30 दिसंबर की सुबह 11 बजे तक निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया, तो पूरे राजनांदगांव रोड पर चक्काजाम किया जाएगा। मोहल्लेवासियों का कहना है कि बिना चेतावनी संकेतक और सुरक्षा इंतजाम के सड़क को खोद दिया गया है, जिससे यह मार्ग दुर्घटनाओं का घर बन चुका है। इस मामले में विभागीय अधिकारी और राजनीतिक दलों की चुप्पी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष विकास चोपड़ा ने कहा कि विभाग और ठेकेदार की मिलीभगत से जनता की परेशानी बढ़ी है। अब देखना यह है कि 30 दिसंबर से पहले विभाग जागता है या जनता को सड़क पर उतरना पड़ता है। बालोद लोक निर्माण विभाग की एक्जीक्यूटिव इंजीनियर से ठेकेदार ही नहीं, बल्कि विभाग के कर्मचारी भी परेशान हैं।

कलेक्टर की फटकार बेअसर
बालोद स्थित दल्ली चौक से रेलवे फाटक तक लोक निर्माण विभाग द्वारा कराए जा रहे सड़क चौड़ीकरण एवं सौंदर्यीकरण कार्य में लगातार लापरवाही और अनियमितता उजागर हो रही है। लगभग करीब 5 माह पहले स्वीकृत यह परियोजना अब तक महज 10 प्रतिशत ही पूरी हो पाई है, जबकि कार्यदिश जारी हुए पांच माह बीत चुके हैं। 12 दिसंबर 2025 कार्य पूर्णता की अंतिम अवधि थी। जनता की परेशानी और शिकायतों के बाद बालोद कलेक्टर स्वयं मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने कार्य की धीमी गति और अव्यवस्थित निर्माण पर विभागीय अधिकारियों व ठेकेदार को जमकर फटकार लगाई थी। इसके बाद आनन फानन में काम फिर से शुरू तो हुआ, लेकिन जमीनी हालात आज भी सुधार की बजाय और अव्यवस्थित नजर आ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, यह परियोजना पीडब्ल्यूडी उप संभाग क्रमांक 1 बालोद के अंतर्गत है। लगभग 1.850 किमी लंबी इस सड़क का चौड़ीकरण, सौंदर्यीकरण एवं डिवाइडर निर्माण कार्य मे. सेवा सिंह ओबेरॉय एंड कंपनी को 5.92 करोड़ रुपये की अनुबंधित राशि में सौंपा गया था। परियोजना के अनुसार सड़क के बीच में 80 सेमी चौड़ा डिवाइडर बनाते हुए दोनों ओर 9-9 मीटर क्षेत्र में निर्माण कार्य होना है। इसमें 5.5 मीटर सड़क, 1.75 मीटर साइड सोल्डर और 1-1 मीटर नाली निर्माण शामिल हैं।
इंजीनियर पर गिरेगी गाज
सूत्रों के अनुसार इस कार्य की जिम्मेदारी सब इंजीनियर दिनेश माहेश्वरी के पास थी। कार्य में लगातार लापरवाही और देरी के चलते उन्हें फिलहाल इस प्रोजेक्ट से अलग किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। लगभग 7.40 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाले इस सड़क सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट में अब भी 90 प्रतिशत कार्य शेष है। जबकि कार्यादेश 25 जून 2025 को जारी हुआ था। सर्वे गलत होने के कारण जमीन अधिग्रहण और कब्जा हटाने की प्रक्रिया नियमानुसार नहीं की गई। पुराने पाइपलाइन और अतिक्रमण से कार्य बाधित सड़क के नीचे पुरानी जल पाइपलाइन बिछी होने के बावजूद शिफ्टिंग के लिए कोई बजट तय नहीं किया गया था। परिणामस्वरूप कार्य शुरू होते ही कई घरों के नल टूटने लगे, जिससे स्थानीय लोग नाराज हुए। अब विभाग ने करीब 2 करोड़ 15 लाख रुपये का नया एस्टीमेट नगर पालिका से मंगवाकर रायपुर स्थित अधीक्षण अभियंता कार…









