बिलासपुर संवाददाता – रोशनी सोनी
बिलासपुर। जंगल मितान संस्था के नेतृत्व में आयोजित वन भ्रमण एवं वन महोत्सव का आठवां वर्ष 28 दिसंबर को कोटा स्थित शिवतराई, अचानकमार टाइगर रिजर्व में भव्य और प्रेरणादायी रूप में संपन्न हुआ। इस अनूठे आयोजन में बिलासपुर संभाग की विभिन्न तहसीलों—बिलासपुर, कोटा, बिल्हा, तखतपुर, रतनपुर, सीपत, मस्तुरी और सकरी—से सैकड़ों महिला एवं पुरुष अधिवक्ताओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत सरकार के केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू रहे। विशिष्ट अतिथियों में महंत विवेक गिरी महाराज (गौरकापा धाम, संरक्षक—अखिल भारतीय संत समिति, छत्तीसगढ़) तथा तखतपुर विधायक धरमजीत सिंह शामिल हुए। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य अधिवक्ता परिषद के नवनिर्वाचित सदस्यों एवं छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के पुनः नियुक्त अतिरिक्त महाधिवक्ता आशीष शुक्ला सहित कई विशिष्टजनों का सम्मान भी किया गया।
जंगल मितान संस्था के संरक्षक अधिवक्ता चंद्रशेखर बाजपेयी ने बताया कि यह आयोजन पिछले आठ वर्षों से निरंतर किया जा रहा है। इसका उद्देश्य अधिवक्ताओं को प्रकृति के सान्निध्य में लाना, वन एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा आदिवासी जीवनशैली और संस्कृति को निकट से समझने का अवसर प्रदान करना है। आयोजन में स्वच्छता, पॉलीथिन प्रतिबंध, छत्तीसगढ़ी संस्कृति और आदिवासी परंपराओं को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया गया।
सुबह से ही प्रतिभागियों ने पारंपरिक छत्तीसगढ़ी नाश्ते—भजिया, चटनी, गुलगुला, फरा—का आनंद लिया। अंगाकर रोटी और जिमीकंद की सब्जी जैसे पारंपरिक व्यंजनों ने सभी का मन मोह लिया। इसके बाद प्रशिक्षित गाइड प्रताप सिंह के नेतृत्व में वन भ्रमण कराया गया, जिसमें अधिवक्ताओं ने अचानकमार की जैव विविधता और प्राकृतिक सौंदर्य को करीब से देखा। धनुष संचालन, अत्याधुनिक फास्टेड टेंट का प्रदर्शन तथा टेलिस्कोप से सौर मंडल का अवलोकन कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहे।
कार्यक्रम में आदिवासी बालिकाओं द्वारा मनोहारी लोकनृत्य प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर अधिवक्ता विजय लक्ष्मी शराफ ने बालिकाओं को नगद प्रोत्साहन राशि 5000 एवं टिफिन बॉक्स भेंट किए, जबकि अन्य महिला अधिवक्ताओं संपा शराफ पाठक, स्नेहलता जायसवाल, कविता आर्या , मीनाक्षी राठौर द्वारा प्रत्येक को ऊनी शाल प्रदान कर सम्मानित किया गया,

मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री तोखन साहू ने अपने संबोधन में कहा कि जंगल में इतनी बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं की उपस्थिति अधिवक्ता समाज के प्रकृति और आदिवासी संस्कृति से गहरे जुड़ाव को दर्शाती है। उन्होंने आदिवासी सांस्कृतिक विरासत की रक्षा और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सुलभ न्याय दिलाने में अधिवक्ताओं की सक्रिय भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने दिल्ली का दौरा निरस्त कर कार्यक्रम में शामिल होने की बात भी साझा की।
महंत विवेक गिरी महाराज ने न्याय, सेवा और सद्कर्म के पथ पर निरंतर अग्रसर रहने का संदेश दिया। वहीं विधायक धरमजीत सिंह ने अचानकमार टाइगर रिजर्व और कोपरा जलाशय को रामसर स्थल का दर्जा दिलाने तथा आगामी विधानसभा सत्र में एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू कराने के लिए प्रयास करने की घोषणा की।
कार्यक्रम में राज्य अधिवक्ता परिषद के सदस्य शैलेन्द्र दुबे सहित अनेक वरिष्ठ अधिवक्ता, न्यायिक अधिकारी, संतजन और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन राजेश दुबे ने किया तथा आभार प्रदर्शन रुपेश त्रिवेदी द्वारा किया गया। शाम 5 बजे यह प्रेरणादायी वन महोत्सव संपन्न हुआ










