सामाजिक सद्भाव से बनी व्यवस्था से होता है समाज सशक्त… मोहन भागवत, सर संघचालक
सामाजिक विवाह परिचय समूह दिला रहा व्यर्थ खर्च से मुक्ति…अधिवक्ता चितरंजय पटेल
समाज की एक व्यवस्था होती है, पर समाज सद्भाव से चलता है, यह उद्गार व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघ चालक मोहन भागवत ने छत्तीसगढ़ के प्रांतीय समाज प्रमुखों को बताया कि जिस समाज में व्यवस्था हावी हो जाती है फिर समाज बिखर जाता है।
श्रीराम मंदिर, रायपुर के महर्षि वाल्मीकि सभागृह में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सामाजिक सद्भाव सम्मेलन में “अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान भाव जागरण” विषय पर सर संघचालक प्रांत स्तरीय समाज प्रमुखों को संबोधन करते हुए कहा कि आप सभी अपने अपने समाज में दायित्व निर्वहन करते हुए सामाजिक विकास हेतु प्रयासरत हैं तथा इस कार्य में सामाजिक व्यवस्था को सामाजिक भावना के अनुरूप बना सके तो निश्चित ही समाज का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होगा।


आज सर संघ चालक की व्यवस्था अनुसार हर समाज से एक प्रतिनिधि ने समाज हित में जारी अनुकरणीय पहल को सबके बीच साझा किया। इसी तारतम्य में अखिल भारतीय अघरिया समाज के प्रतिनिधि के रूप में उच्च न्यायालय अधिवक्ता चितरंजय सिंह पटेल ने बताया कि हम सामाजिक नियमावली के पालन सुनिश्चित कर सामाजिक कुरीतियों से दूर रहने का प्रयास करते हैं तो वहीं समाज में युवक_ युवतियों के वैवाहिक रिश्ते तय करने में होने वाले अनावश्यक खर्च को रोकने वैवाहिक समूह के माध्यम से विवाह योग्य युवक युवतियों का परिचय प्रकाशित कर रहे हैं फलस्वरूप इस प्रकाशन के माध्यम से ९० फीसदी रिश्ते तय हो रहे हैं और वैवाहिक परिचय समूह से जुड़ कर समाज के लोग लाखों रुपए के अनावश्यक व्यय से बच रहा है जो अनुकरणीय पहल है। आज अखिल भारतीय अघरिया समाज की ओर से अधिवक्ता चितरंजय पटेल के साथ याद लाल नायक (तमनार), सादेलाल पटेल (बिलासपुर) आदि लोग शामिल रहे।
विदित हो कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के शताब्दी वर्ष में संघ परिवार अलग अलग आयोजनों के माध्यम से सनातन हिंदू संस्कृति के सशक्तिकरण हेतु आग्रह कर रही है इसी क्रम में सामाजिक सद्भाव मंच छत्तीसगढ़ प्रांत टोली ने आज समाज प्रमुखों का प्रांत स्तरीय आयोजन किया था जिसमें सुदूर वनांचलों से जनजातीय समाज प्रतिनिधियों के साथ ही सर्व समाज के प्रांत स्तरीय दायित्ववान समाज प्रमुखों की गरिमामय उपस्थिति रही जिनमें संघ चालक मोहन भागवत ने सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का भाव जगाने सकारात्मक मार्गदर्शन दिया।










